Punjab: पंजाब कांग्रेस का कलह पहुंचा दिल्ली, केसी वेणुगोपाल के साथ दिग्गजों की बैठक से सुलझेगी गुटबाजी – The Hill News

Punjab: पंजाब कांग्रेस का कलह पहुंचा दिल्ली, केसी वेणुगोपाल के साथ दिग्गजों की बैठक से सुलझेगी गुटबाजी

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के भीतर लंबे समय से जारी अंतर्कलह और गुटबाजी अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को सुलझाने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने सक्रियता बढ़ा दी है। इसी सिलसिले में पंजाब कांग्रेस के तीन दिग्गज नेता—सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी इस समय देश की राजधानी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, पंजाब के मौजूदा अशांत राजनीतिक हालात को लेकर आज कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ इन नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक होने की संभावना है। इस बैठक में पंजाब इकाई के भीतर चल रही खींचतान, अनुशासनहीनता और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है।

भूपेश बघेल की रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल
पंजाब कांग्रेस में जारी इस घमासान के पीछे हाल ही में संपन्न हुआ कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल का 10 दिवसीय दौरा एक बड़ी वजह माना जा रहा है। बघेल ने पंजाब के विभिन्न जिलों का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी थी और अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी है। उनके इस दौरे के दौरान पार्टी की आंतरिक फूट सार्वजनिक रूप से सामने आई थी।

भूपेश बघेल के दौरे की मुख्य चुनौतियां
• पंजाब के 18 जिलों में प्रभारी के सामने ही कार्यकर्ताओं के बीच विवाद देखने को मिला।
• कई स्थानों पर भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ नारेबाजी हुई।
• चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने खुलेआम अपना विरोध दर्ज कराया।
• सांगठनिक नियुक्तियों और प्रदेश नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए।

राहुल गांधी से मिलने की कोशिश में जुटे विधायक
केवल शीर्ष नेता ही नहीं, बल्कि पंजाब के कई विधायक भी प्रदेश नेतृत्व से खुश नहीं हैं। प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में विधायकों के एक बड़े समूह ने मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है। विधायकों का तर्क है कि यदि समय रहते गुटबाजी पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

असंतष्ट खेमे का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विफल रहे हैं, जिसके कारण कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है। वहीं, राजा वड़िंग के समर्थकों का कहना है कि कुछ नेता अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के कारण संगठन को कमजोर कर रहे हैं।

हाईकमान के फैसले पर टिकी निगाहें
केसी वेणुगोपाल के साथ होने वाली इस संभावित बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। इसमें असंतुष्ट नेता एक बार फिर अपनी शिकायतों का पुलिंदा हाईकमान के सामने रखेंगे। हालांकि, कांग्रेस पार्टी की ओर से इस बैठक को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या एजेंडा जारी नहीं किया गया है, लेकिन दिल्ली में पंजाब के नेताओं की मौजूदगी बड़े बदलाव के संकेत दे रही है।

पंजाब में आम आदमी पार्टी और भाजपा की बढ़ती सक्रियता के बीच कांग्रेस के लिए अपनी इस आंतरिक लड़ाई को खत्म करना सबसे बड़ी चुनौती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान केसी वेणुगोपाल के माध्यम से इन नेताओं के बीच सुलह का कोई रास्ता निकालता है या अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ कड़े फैसले लिए जाते हैं। फिलहाल, पंजाब की राजनीति में ‘दिल्ली वाली बैठक’ चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

 

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