चंडीगढ़। पंजाब की भगवंत सिंह मान सरकार ने जन सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने प्रदेश के सभी शहरों को ‘खुला मैनहोल मुक्त’ बनाने के लिए 30 जून 2026 की समय सीमा निर्धारित की है। उन्होंने सभी नगर आयुक्तों और अतिरिक्त उपायुक्तों (शहरी विकास) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस निर्धारित तिथि तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करें। मंत्री ने चेतावनी दी है कि ‘मिशन क्लीन पंजाब’ के तहत चलाए जा रहे इस अभियान में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा ऑडिट में सामने आई खामियां
यह निर्देश राज्य भर में कराए गए एक व्यापक सुरक्षा ऑडिट के बाद जारी किया गया है। मानसून सीजन से पहले कराए गए इस ऑडिट में सीवरेज बुनियादी ढांचे में कुल 1,451 खामियां पाई गई थीं। हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इनमें से 1,000 से अधिक कमियों को पहले ही सुधारा जा चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शेष बचे हुए सभी खुले मैनहोल को बंद करना अब अनिवार्य है, ताकि बारिश के मौसम में जलभराव के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना या जानमाल का नुकसान न हो।
नागरिक सुरक्षा सर्वोपरि
खुले मैनहोल को ‘डेथ ट्रैप’ यानी मौत का जाल बताते हुए हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी कि इस मामले में शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाई जाएगी। यह अभियान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में शुरू किए गए ‘मिशन क्लीन पंजाब’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों को सुरक्षित और स्वच्छ बनाना है।
जवाबदेही तय करने के लिए तकनीक का सहारा
प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय निकाय विभाग ने एक एआई (AI) एकीकृत मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप के माध्यम से मैनहोल को बंद करने की प्रक्रिया की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जाएगी। इसके अलावा, नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कड़े नियम लागू किए गए हैं।
अभियान की मुख्य विशेषताएं और कड़े नियम
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समय सीमा: 30 जून 2026 तक पंजाब के हर शहर को खुला मैनहोल मुक्त बनाना अनिवार्य।
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अनिवार्य निरीक्षण: नागरिक अधिकारियों को प्रतिदिन सुबह 7 बजे से 8 बजे तक अनिवार्य रूप से फील्ड निरीक्षण करना होगा।
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वॉर रूम की स्थापना: सभी शहरी केंद्रों में 24×7 ‘वॉर रूम’ स्थापित किए जाएंगे, जो जलभराव, सीवर ब्लॉकेज और मानसून से संबंधित शिकायतों की निगरानी करेंगे।
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तकनीकी निगरानी: मैनहोल बंद करने की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए एआई आधारित मोबाइल ऐप का उपयोग।
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सख्त कार्रवाई: लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अंतिम चरण में अभियान
डेडलाइन समाप्त होने में अब केवल कुछ ही दिन बचे हैं, ऐसे में प्रशासनिक सचिव स्थानीय निकाय घनश्याम थोरी व्यक्तिगत रूप से इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि यदि कोई अधिकारी खुले मैनहोल को बंद करने में विफल रहता है या काम में लापरवाही बरतता है, तो उसकी जवाबदेही तय की जाएगी और उसे कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। सरकार का पूरा ध्यान मानसून के सक्रिय होने से पहले राज्य के सीवरेज सिस्टम को सुरक्षित बनाने पर है ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
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