तेलअवीव। पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की तमाम वैश्विक कोशिशों के बावजूद तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। वर्तमान में यह पूरा क्षेत्र एक भीषण ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। इजरायल-हमास के बीच जारी खूनी संघर्ष, लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह की सक्रियता और ईरान के साथ अमेरिका व इजरायल की बढ़ती टकराहट ने पूरे इलाके को अस्थिर कर दिया है। इस अशांति का असर केवल स्थानीय देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए भी यह गहरी चिंता का विषय बन गया है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक निवास करते हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा व आर्थिक हित भी सीधे तौर पर यहां की स्थिरता से जुड़े हुए हैं। यद्यपि भारत ने बार-बार कूटनीतिक समाधान और संयम बरतने की अपील की है, लेकिन हालिया सैन्य कार्रवाइयों ने शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।
इस बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने गाजा में हमास की सैन्य शाखा के प्रमुख मोहम्मद ओदेह को निशाना बनाकर एक बड़ा हमला किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई के दूरगामी परिणाम होंगे। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने इस अभियान की सफलता की पुष्टि करते हुए कहा कि उनकी सेना ने 7 अक्टूबर के नरसंहार के मुख्य मास्टरमाइंड मोहम्मद दीफ को मार गिराया है। नेतान्याहू ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इजरायल अपने शत्रुओं का पीछा करना नहीं छोड़ेगा। इजरायल इस हमले को आतंकवाद के विरुद्ध अपनी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डर है कि इससे गाजा में मानवीय संकट और अधिक गहरा सकता है और आम नागरिकों की मृत्यु का आंकड़ा बढ़ सकता है। दूसरी ओर, हमास ने इस कार्रवाई को शांति वार्ता की प्रक्रिया में जानबूझकर डाली गई बाधा करार दिया है।
युद्ध का एक अन्य मोर्चा लेबनान सीमा पर खुला हुआ है। मंगलवार को इजरायल के उत्तरी इलाकों में लगातार रॉकेट हमलों के सायरन गूंजते रहे। हिजबुल्लाह द्वारा किए जा रहे ड्रोन और रॉकेट हमलों के जवाब में इजरायली सेना ने अपनी आक्रामकता बढ़ा दी है। सूचनाओं के अनुसार, इजरायल ने लेबनान में ‘येलो लाइन’ को पार कर जमीनी कार्रवाई तेज कर दी है और हिजबुल्लाह के सैकड़ों ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से अब तक इस संघर्ष में 3200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
वहीं, ईरान और अमेरिका के बीच भी तलवारें खिंची हुई हैं। सोमवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित मिसाइल केंद्रों और माइन्स बिछाने वाले ईरानी जहाजों पर बमबारी की। अमेरिका ने इस कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है। हालांकि, ईरान ने इसे युद्धविराम समझौते का उल्लंघन मानते हुए जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। इसके बावजूद, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के संकेत भी मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ एक बड़ा समझौता लगभग तैयार है, लेकिन उसे अंतिम रूप देने में थोड़ा समय लग सकता है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी उम्मीद जताई है कि यह डील आने वाले कुछ दिनों में संभव है। प्रस्तावित समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पुनः खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े अंकुश लगाने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
इस जटिल संकट का वैश्विक प्रभाव अत्यंत गंभीर है। युद्ध की आशंकाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और समुद्री व्यापारिक मार्ग असुरक्षित हो गए हैं। भारत, जो ईरान और इजरायल दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है, निरंतर संवाद की वकालत कर रहा है। ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत ने अपनी चिंताओं को प्रमुखता से रखा है। फिलहाल, क्षेत्र में शांति की राह चुनौतियों से भरी नजर आ रही है और वैश्विक शक्तियों की भूमिका इस संकट को सुलझाने में निर्णायक होगी।
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