शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा निर्णय लेते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी संजय गुप्ता को प्रदेश का मुख्य सचिव नियुक्त किया है। 1988 बैच के अधिकारी संजय गुप्ता अब तक मुख्य सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे, लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति से मात्र पांच दिन पूर्व सरकार ने उन्हें पूर्णकालिक मुख्य सचिव के रूप में तैनात करने के आदेश जारी कर दिए हैं। कार्मिक विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
संजय गुप्ता की यह पदोन्नति प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। गौरतलब है कि उनका कार्यकाल अब बहुत कम बचा है। कैलेंडर के अनुसार, संजय गुप्ता 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन उस दिन रविवार होने के कारण वे 30 मई को अपने पद से रिटायर होंगे। ऐसे में रिटायरमेंट से ठीक पांच दिन पहले मुख्य सचिव के पद पर उनकी नियमित तैनाती को सरकार की ओर से एक विशेष सम्मान और पदोन्नति के उपहार के रूप में देखा जा रहा है। 1988 बैच के अधिकारी होने के नाते वे प्रदेश के वरिष्ठतम नौकरशाहों में शुमार हैं।
मुख्य सचिव का कार्यभार संभालने से पहले संजय गुप्ता नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे थे। कार्यवाहक मुख्य सचिव के रूप में उन्होंने पिछले कुछ समय से प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब सरकार ने उनके अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें इस सर्वोच्च पद की नियमित जिम्मेदारी सौंपी है। कार्मिक विभाग ने उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए तैनाती के स्पष्ट आदेश दे दिए हैं।
संजय गुप्ता की पूर्णकालिक नियुक्ति के साथ ही सरकार ने अन्य विभागों की जिम्मेदारियों में भी फेरबदल किया है। संजय गुप्ता के पास अब तक नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग का जो प्रभार था, उसे अब अन्य अधिकारी को हस्तांतरित कर दिया गया है। कार्मिक विभाग द्वारा जारी किए गए नए आदेशों के अनुसार, सचिव सहकारिता अमरजीत को अब नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। अमरजीत अब अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण विभाग का कामकाज भी देखेंगे।
प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि इस नियुक्ति से प्रदेश के शीर्ष पदों पर अधिकारियों की वरिष्ठता का सम्मान सुनिश्चित हुआ है। यद्यपि मुख्य सचिव के रूप में उनका कार्यकाल अब मात्र कुछ ही दिनों का शेष रह गया है, लेकिन इस सर्वोच्च पद पर उनकी नियमित तैनाती उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 30 मई को उनके सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग में एक बार फिर नए मुख्य सचिव के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल, अमरजीत द्वारा नया कार्यभार संभाले जाने के बाद नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के कार्यों में निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले ने सचिवालय के भीतर प्रशासनिक समीकरणों को स्पष्ट कर दिया है
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