शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज छोटे शिमला स्थित नवोन्नत सीबीएसई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दौरा किया और वहां के विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया। इस दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री से उनकी व्यक्तिगत जिंदगी से लेकर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था तक पर कई सवाल पूछे, जिनका उन्होंने बेहद सहजता और बेबाकी से जवाब दिया।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में काम कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम जल्द ही सबके सामने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके इस दौरे का उद्देश्य कोई औपचारिक भाषण देना नहीं, बल्कि छात्रों से सीधा संवाद कर व्यवस्था की कमियों को पहचानना और उन्हें प्रभावी ढंग से दूर करना है। सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में बदलना है ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने सरकारी शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि वे अत्यधिक सक्षम और मेहनती हैं और अपनी योग्यता के बल पर प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त हुए हैं।
छात्रों के साथ हुई इस चर्चा में कई रोचक सवाल सामने आए। छात्र आरव ठाकुर ने मुख्यमंत्री से उनके स्कूल के दिनों के पसंदीदा खेल के बारे में पूछा। इसके जवाब में सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि वे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लेते थे और हॉकी, क्रिकेट तथा हैंडबॉल खेलते थे। उन्होंने साझा किया कि वे हैंडबॉल टीम के कप्तान भी रहे और उन्हें ट्रेकिंग का बहुत शौक है। उन्होंने अपनी पहली ट्रेकिंग तापरी से रिकांगपिओ तक की थी।
स्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए एक छात्र ने बताया कि वर्तमान में यहां भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) का कोई शिक्षक नहीं है और राजनीति विज्ञान का केवल एक शिक्षक है। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि चूंकि अब यह स्कूल सीबीएसई संस्थान में परिवर्तित हो चुका है, इसलिए 30 जून तक सभी रिक्त पदों को भर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत अब छात्रों को विषयों के अधिक विकल्प मिलेंगे।
कक्षा 12 के छात्र दिव्यांश ने पूछा कि क्या आज के दौर में केवल अंक महत्वपूर्ण हैं या कौशल (स्किल्स), क्योंकि अधिकांश छात्र 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि हालांकि अंक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन छात्रों को एक कुशल, आत्मविश्वासी और सक्षम व्यक्ति बनना चाहिए। कौशल ही भविष्य की असली ताकत है।
नशे के खिलाफ अभियान पर एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस लड़ाई में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि नशा तस्कर पहले युवाओं को इसकी लत लगाते हैं और फिर उन्हें तस्करी के काम में धकेल देते हैं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे ऐसे तस्करों की सूचना पुलिस को दें और जागरूकता फैलाएं। उन्होंने घोषणा की कि 5 जून को शिमला में एक ‘एंटी-चिट्टा रैली’ आयोजित की जाएगी और वरिष्ठ छात्रों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
सातवीं कक्षा की छात्रा राधा ने मुख्यमंत्री से उनके इस पद तक पहुंचने के सफर के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि 10वीं कक्षा में स्कूल में एक हड़ताल के दौरान वे पहली बार नेतृत्व के लिए आगे आए और 17 साल की उम्र में क्लास रिप्रेजेंटेटिव बने। इसके बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई के दौरान विभाग प्रतिनिधि रहे। उन्होंने शिमला नगर निगम में पार्षद, एनएसयूआई के अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दीं। उन्होंने याद किया कि उनके परिवार के लोग उन्हें राजनीति के बजाय नौकरी करने की सलाह देते थे, लेकिन संघर्षों के बीच वे डटे रहे।
सफलता का मंत्र देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में ऊंचाइयों को छूने के लिए अनुशासन, समर्पण और संघर्ष करने की इच्छाशक्ति अनिवार्य है। सफलता उन्हीं को मिलती है जो लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर कड़ी मेहनत करते हैं। इस अवसर पर शिमला के मेयर सुरिंदर चौहान, शिक्षा सचिव राकेश कंवर, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली और स्कूल का स्टाफ भी उपस्थित रहा।
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