काठमांडू। नेपाल से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है, जहां दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करने का गौरव हासिल करने के कुछ ही घंटों बाद दो भारतीय पर्वतारोहियों की जान चली गई। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इन पर्वतारोहियों की पहचान अरुण कुमार तिवारी और संदीप अरे के रूप में हुई है। नेपाल के पर्यटन और पर्वतारोहण अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पर्वतारोहियों की मौत का मुख्य कारण अत्यधिक थकान और ‘हाई एल्टीट्यूड सिकनेस’ बताया जा रहा है।
नेपाल के एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन के महासचिव ऋषि भंडारी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि अरुण कुमार तिवारी और संदीप अरे ने सफलतापूर्वक 8,848.86 मीटर ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया था। हालांकि, जब वे चोटी से नीचे उतर रहे थे, तब उनके शरीर ने साथ देना छोड़ दिया। वे शारीरिक रूप से इतने थक चुके थे कि उनके लिए आगे बढ़ पाना असंभव हो गया था। उनके साथ मौजूद गाइडों ने उन्हें बचाने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया और प्राथमिक उपचार भी दिया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी।
मौत के समय को लेकर मिली जानकारी के अनुसार, संदीप अरे ने बुधवार को माउंट एवरेस्ट फतह किया था और उनकी मृत्यु गुरुवार को हुई। वहीं, अरुण कुमार तिवारी ने गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे चोटी पर कदम रखा था, लेकिन नीचे उतरते समय उनकी भी मृत्यु हो गई। ऋषि भंडारी ने बताया कि गाइडों ने अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश की थी, लेकिन शरीर के पूरी तरह निढाल हो जाने के कारण वे सफल नहीं हो सके।
उल्लेखनीय है कि बुधवार का दिन माउंट एवरेस्ट के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड लेकर आया था। संदीप और अरुण सहित कुल 274 पर्वतारोहियों ने एक ही दिन में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी फतह की थी, जो अब तक का एक नया कीर्तिमान है। इस समूह में भारत के तुलसी रेड्डी पालपुनूरी और अजय पाल सिंह धालीवाल भी शामिल थे, जो सुरक्षित हैं। इनके अलावा अगले दिन गुरुवार को भारत की एक अन्य महिला पर्वतारोही लक्ष्मीकांता मंडल ने भी एवरेस्ट शिखर पर पहुंचकर देश का मान बढ़ाया।
एवरेस्ट की चढ़ाई जितनी कठिन होती है, उससे कहीं अधिक खतरनाक वहां से नीचे उतरना माना जाता है। 8,000 मीटर से ऊपर के क्षेत्र को ‘डेथ ज़ोन’ कहा जाता है, जहां ऑक्सीजन की भारी कमी होती है और अत्यधिक थकान के कारण पर्वतारोहियों का शरीर काम करना बंद कर देता है। इन दो भारतीय जांबाजों की मौत ने पर्वतारोहण जगत को शोक में डुबो दिया है। वर्तमान में दोनों के पार्थिव शरीरों को नीचे लाने की प्रक्रिया और अन्य कानूनी औपचारिकताओं पर काम किया जा रहा है। पर्वतारोहण संगठनों ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतक परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।
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