नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने का मामला अब और गहराता जा रहा है। इस धांधली की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम अब उन छात्रों के घरों तक पहुंच गई है, जिन्होंने कथित तौर पर अवैध तरीके से प्रश्न पत्र हासिल किए थे। हाल की कार्रवाई में सीबीआई ने कई ऐसे अभिभावकों से कड़ी पूछताछ की है, जिन पर लीक हुए प्रश्न पत्र को मोटी रकम देकर खरीदने का आरोप है।
जांच एजेंसी की आठ सदस्यीय टीम ने पिछले शनिवार और रविवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ और लातूर में कई ठिकानों पर छापेमारी की। नांदेड़ के विद्युत नगर इलाके में एक संदिग्ध परिवार के घर की तलाशी ली गई। जांच अधिकारियों को पुख्ता जानकारी मिली थी कि इन परिवारों ने अपनी बेटियों का मेडिकल कॉलेज में दाखिला सुनिश्चित कराने के लिए बिचौलियों के माध्यम से लीक प्रश्न पत्र प्राप्त किए थे।
जांच में यह बात सामने आई है कि परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र हासिल करने के लिए अभिभावकों ने बिचौलियों को 5 से 10 लाख रुपये तक का भुगतान किया था। कुछ मामलों में यह रकम 25 लाख रुपये तक होने का अनुमान है। सीबीआई का मानना है कि यह गिरोह केवल प्रश्न पत्र लीक करने वालों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें वे संपन्न माता-पिता भी शामिल थे जो अपने बच्चों के करियर के लिए बड़ी बोली लगाने को तैयार थे।
नांदेड़ में हुई कार्रवाई के दौरान सीबीआई ने एक व्यवसायी के घर पर लगभग आठ घंटे तक सघन पूछताछ की। उनके परिवार की एक छात्रा ने 3 मई को नीट की परीक्षा दी थी। आरोप है कि छात्रा के पिता ने पेपर के लिए 10 लाख रुपये दिए थे, जो दो अलग-अलग व्यक्तियों को किस्तों में चुकाए गए थे। इस दौरान अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है। कॉल रिकॉर्ड्स और संदेशों की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि पैसों के लेन-देन और नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
इस मामले में कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जांच टीम उस छात्रा के पुणे स्थित एक कोचिंग सेंटर से जुड़ाव की पड़ताल कर रही है, जहां वह परीक्षा से करीब 15 दिन पहले रुकी थी। नांदेड़ के एक निजी कोचिंग संस्थान एआईबी का नाम भी इस जांच में सामने आया है, जिसने परीक्षा से पहले ही बेहतरीन नतीजों के दावे वाले पोस्टर लगा दिए थे। संस्थान के संचालक अतुल मोरे ने हालांकि सीबीआई की कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि वह छात्रा उनके संस्थान में पढ़ती थी और मॉक टेस्ट में उसका प्रदर्शन औसत था।
सीबीआई को संदेह है कि यह नेटवर्क पुणे, लातूर और नांदेड़ जैसे जिलों में बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। ऐसी भी आशंका है कि कुछ अभिभावकों ने अपनी दी हुई रकम की भरपाई के लिए प्रश्न पत्र को आगे अन्य लोगों को भी बेचा हो। जांच एजेंसी ने अब तक इस मामले में कई मास्टरमाइंड, सॉल्वर और बिचौलियों को गिरफ्तार किया है। अब एजेंसी का पूरा ध्यान उन लाभार्थियों की पहचान करने पर है, जिन्होंने इस पेपर लीक का लाभ उठाकर ईमानदारी से परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की छापेमारी होने की संभावना जताई जा रही है।