शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे चार नगर निगमों और 51 शहरी निकायों के लिए चुनावी शोर थम चुका है। अब बारी प्रदेश की जनता की है, जो रविवार को अपने मताधिकार के माध्यम से तय करेगी कि शहर की सत्ता की बागडोर किसके हाथ में होगी। इन चुनावों को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के लिए ‘सेमीफाइनल’ के तौर पर देखा जा रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस ने प्रचार अभियान के दौरान अपनी पूरी ताकत झोंक दी और मुख्यमंत्री स्वयं तीन दिनों तक चारों नगर निगमों में धुंआधार प्रचार करते नजर आए।
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, यह चुनाव सुक्खू सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल की परीक्षा है। अगले एक वर्ष तक प्रदेश में कोई अन्य बड़ा चुनाव प्रस्तावित नहीं है, इसलिए इन नतीजों का प्रभाव दूरगामी होगा। कांग्रेस ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की थी, जिसके तहत पूरे मंत्रिमंडल को पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया और विधायकों को वार्ड स्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई। इन नेताओं के लिए जीत न केवल पार्टी की प्रतिष्ठा का प्रश्न है, बल्कि उनके व्यक्तिगत राजनीतिक कद को बढ़ाने का भी एक सुनहरा अवसर है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के लिए भी यह चुनाव एक बड़ी अग्निपरीक्षा है। अध्यक्ष पद संभालने के बाद उनके नेतृत्व में यह पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है। उन्होंने हर मंत्री और विधायक को विशेष चुनावी ड्यूटी देकर सांगठनिक एकता का संदेश दिया है। पार्टी की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने के लिए शिमला स्थित मुख्यालय में एक अत्याधुनिक ‘वॉर रूम’ भी बनाया गया है, जहां से चारों नगर निगमों—मंडी, पालमपुर, धर्मशाला और सोलन की पल-पल की खबरें संकलित की जा रही हैं।
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल भाजपा भी कम आक्रामक नहीं है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दावा किया है कि चारों नगर निगमों में कमल खिलेगा। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों और झूठी गारंटियों के कारण प्रदेश की जनता में भारी आक्रोश है। जयराम ठाकुर के अनुसार, हिमाचल की जनता इस सरकार की कार्यप्रणाली से त्रस्त हो चुकी है और इस निकाय चुनाव के जरिए वह कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने की शुरुआत करेगी। भाजपा को उम्मीद है कि वह ऐतिहासिक बहुमत के साथ इन चुनावों में जीत दर्ज करेगी।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो चारों नगर निगमों में मुकाबला बेहद दिलचस्प है। मंडी नगर निगम पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है, जबकि पालमपुर में कांग्रेस का शासन है। सोलन और धर्मशाला की स्थिति थोड़ी पेचीदा है, जहां महापौर और उपमहापौर के पदों पर दोनों पार्टियों का मिला-जुला कब्जा रहा है। ऐसे में रविवार को होने वाला मतदान यह स्पष्ट कर देगा कि जनता ने मुख्यमंत्री सुक्खू के विकास कार्यों पर मुहर लगाई है या फिर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के आरोपों को सही माना है। फिलहाल, दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं और रविवार की सुबह का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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