देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने कई सालों से चले आ रहे पुराने मिथकों और राजनीतिक धारणाओं को ध्वस्त कर दिया है। साल 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने न केवल दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की, बल्कि राज्य के इतिहास में पहली बार किसी दल ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर ‘सरकार रिपीट’ न होने के मिथक को जड़ से खत्म कर दिया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री आवास से जुड़ी उस डरावनी धारणा को भी धामी ने गलत साबित कर दिखाया है, जो लंबे समय से प्रदेश के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी।
वर्षों से उत्तराखंड में यह माना जाता रहा है कि जो भी मुख्यमंत्री देहरादून स्थित आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास में निवास करता है, वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता। इस अंधविश्वास या राजनीतिक संयोग का असर पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों पर साफ देखा गया था। उदाहरण के तौर पर, कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत इस मिथक से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान मुख्य बंगले के बजाय उसके पास स्थित एनेक्सी भवन में रहना पसंद किया। उन्होंने मुख्य आवास में रहने से परहेज किया ताकि उनकी कुर्सी पर कोई संकट न आए, लेकिन अंततः उन्हें भी सत्ता गंवानी पड़ी।
यही स्थिति भाजपा के पिछले कार्यकाल में भी देखने को मिली थी। साल 2017 में जब त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने इस मिथक को चुनौती देते हुए मुख्यमंत्री आवास में रहना शुरू किया। हालांकि, संयोगवश वे भी अपना चार साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और उन्हें समय से पहले पद छोड़ना पड़ा। इन लगातार हुई घटनाओं ने इस धारणा को और अधिक मजबूत कर दिया था कि यह सरकारी बंगला मुख्यमंत्रियों के लिए मुफीद नहीं है।
लेकिन जब पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की कमान संभाली, तो उन्होंने बिना किसी झिझक या डर के इसी आधिकारिक आवास को अपना ठिकाना बनाया। धामी के लिए यह आवास न केवल सकारात्मक साबित हुआ, बल्कि उनके नेतृत्व में सरकार ने और अधिक राजनीतिक मजबूती हासिल की। उनके इसी आवास में रहते हुए भाजपा ने 2022 में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और अब वे सफलतापूर्वक अपने शासन के पांचवें वर्ष की ओर बढ़ रहे हैं।
पुष्कर सिंह धामी ने अपनी कार्यशैली और ठोस निर्णयों से यह संदेश दिया है कि सफलता और स्थिरता अंधविश्वासों से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और कड़े परिश्रम से मिलती है। आज उत्तराखंड की राजनीति में उन्हें एक ऐसे निर्णायक नेता के रूप में देखा जा रहा है जिसने राज्य की अस्थिर छवि को बदलकर स्थिरता प्रदान की है। मुख्यमंत्री आवास को लेकर वर्षों से बना हुआ डर अब धामी के कार्यकाल में बीते दौर की बात हो गई है।
Pls read:Uttarakhand: वाराही धाम मंदिर के भव्य स्वरूप का मुख्यमंत्री ने किया शिलान्यास