शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश किया। हिमाचल के कूटनीतिक और आर्थिक इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब बजट के आकार में पिछली बार की तुलना में वृद्धि के बजाय कटौती की गई है। इस बार का कुल बजट 54,928 करोड़ रुपये का है, जो पिछले वर्ष के 58,000 करोड़ रुपये से अधिक के बजट की तुलना में लगभग 3,586 करोड़ रुपये कम है। बजट भाषण के दौरान सदन में भारी हंगामा भी देखने को मिला, जिसके कारण कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्ष ने मुख्यमंत्री की कुछ टिप्पणियों पर कड़ा एतराज जताते हुए वेल में आकर नारेबाजी की, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विवादित शब्दों को रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए।
बजट में मुख्यमंत्री ने महिलाओं, युवाओं और किसानों को केंद्र में रखते हुए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। ‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना’ के तीसरे चरण का ऐलान करते हुए उन्होंने एक लाख महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया है। इसके साथ ही ‘मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना’ में शामिल परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का प्रावधान किया गया है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति की रजिस्ट्री पर फीस को घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि अन्य के लिए यह 8 प्रतिशत रहेगी।
किसानों और पशुपालकों के लिए भी बजट में विशेष राहत दी गई है। सरकार ने दूध के खरीद मूल्य में 10 रुपये प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि की है। अब गाय का दूध 51 की जगह 61 रुपये और भैंस का दूध 61 की जगह 71 रुपये प्रति लीटर खरीदा जाएगा। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य 80 रुपये और मक्की का 50 रुपये प्रति किलो किया गया है। पहली बार अदरक पर 30 रुपये और हल्दी पर 150 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य तय किया गया है।
शिक्षा क्षेत्र के लिए 9,660 करोड़ रुपये का भारी-भरकम आवंटन किया गया है। मुख्यमंत्री ने हमीरपुर में साइंस कॉलेज और गुलेर में फाइन आर्ट कॉलेज खोलने की घोषणा की। साथ ही, कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों के विद्यार्थियों को जिला मुख्यालयों में शिफ्ट होने पर 5,000 रुपये का स्टाइपेंड देने का प्रस्ताव रखा है। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए मछलियों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 100 रुपये प्रति किलो तय किया गया है और रॉयल्टी दर को 7 प्रतिशत से घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बजट का आकार कम होने के बावजूद सरकार अपनी सभी 10 गारंटियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और व्यर्थ के संस्थानों को बंद कर संसाधनों का सही इस्तेमाल किया जाएगा।
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