Iran: अली लारीजानी की मौत के बाद भड़का ईरान, मिसाइल की बौछार से मिडिल ईस्ट में हाहाकार

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से वापसी की राहें बेहद धुंधली नजर आ रही हैं। ईरान के मुख्य सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी की मौत के बाद तेहरान ने बदले की जो आग जलाई है, उसने अब पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। लारीजानी की मौत के बाद ईरान के नेतृत्व में छाई बौखलाहट अब मिसाइलों और घातक ड्रोनों के रूप में पड़ोसी देशों पर बरस रही है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने न केवल मिडिल ईस्ट में तबाही और मौतों का सिलसिला तेज कर दिया है, बल्कि दुनिया के सामने एक ऐसा ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है, जिसकी तपिश अब खाड़ी देशों की सीमाओं को लांघकर वैश्विक स्तर पर महसूस की जा रही है।

हमलों का सिलसिला और रक्षा प्रणालियों की सक्रियता
मंगलवार का दिन खाड़ी के कई देशों के लिए किसी भयावह सपने जैसा रहा। तड़के से ही ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें आने लगीं। कतर के रक्षा मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उसकी सशस्त्र सेनाओं ने देश की सीमा में प्रवेश करने वाली एक संदिग्ध मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। कतर की अत्याधुनिक हवाई रक्षा प्रणाली ने समय रहते इस खतरे को भांप लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

ठीक उसी समय, कुवैत में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। कुवैत नेशनल गार्ड ने जानकारी दी कि भोर के समय उन्होंने एक अज्ञात मानवरहित विमान (ड्रोन) को मार गिराया, जो संवेदनशील ठिकानों की ओर बढ़ रहा था। कुवैती सेना ने स्पष्ट किया कि उनके सैनिक दुश्मन की हरकतों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और किसी भी हवाई घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है। ये देश पिछले कई घंटों से लगातार आ रहे मिसाइल और ड्रोन खतरों को रोकने के लिए अपनी पूरी सैन्य ताकत झोंक चुके हैं।

सऊदी अरब, यूएई और बहरीन में हाई अलर्ट
ईरान की मिसाइलों का निशाना केवल कतर या कुवैत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन पर भी हमले तेज कर दिए हैं। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि देश के पूर्वी क्षेत्र में एक आत्मघाती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर उसे नष्ट किया गया है। पूर्वी क्षेत्र सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां किया गया कोई भी हमला वैश्विक तेल बाजार को हिलाने की क्षमता रखता है।

उधर, संयुक्त अरब अमीरात में भी हवाई रक्षा प्रणालियां लगातार सक्रिय हैं। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को घोषणा की कि उनकी सेनाएं ईरान से आने वाले खतरों का मजबूती से जवाब दे रही हैं। इसी बीच दुबई से एक चौंकाने वाली खबर आई, जहां स्थानीय निवासियों ने एक बेहद जोरदार धमाके की आवाज सुनी। हालांकि प्रशासन ने तुरंत स्थिति स्पष्ट नहीं की, लेकिन इस धमाके ने पर्यटन और व्यापार के इस वैश्विक केंद्र में दहशत पैदा कर दी है। बहरीन ने भी अपने हवाई क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी है और अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए अतिरिक्त सेना तैनात की है।

मौत का तांडव और आर्थिक तबाही
28 फरवरी को शुरू हुआ यह संघर्ष अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए जा रहे इन लगातार हमलों में अब तक कई मासूम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान जा चुकी है। मौत का आंकड़ा हर गुजरते घंटे के साथ बढ़ता जा रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट पैदा कर दिया है।

तबाही का यह मंजर केवल इंसानी जानों तक सीमित नहीं है। आर्थिक मोर्चे पर भी खाड़ी देशों को अपूरणीय क्षति हो रही है। ईरान के हमलों ने तेल रिफाइनरियों, गैस संयंत्रों और महत्वपूर्ण व्यापारिक बंदरगाहों को निशाना बनाया है। इस कारण पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है। मिडिल ईस्ट, जो दुनिया की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा पूरा करता है, वहां युद्ध की इस आग ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ दिया है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो दुनिया भर के देशों में महंगाई और ईंधन की कमी का संकट गहरा सकता है।

ईरान का तर्क और खाड़ी देशों का पलटवार
ईरान ने इन हमलों के पीछे एक अजीबोगरीब तर्क दिया है। तेहरान का कहना है कि वह उन देशों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है जिनका उपयोग अमेरिका उसके विरुद्ध युद्ध में कर रहा है। ईरान के मुताबिक, खाड़ी देशों की भूमि पर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने उसकी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं।

हालांकि, खाड़ी देशों ने ईरान के इन दावों को पूरी तरह से निराधार और गलत बताया है। सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने जोर देकर कहा है कि उन पर किए जा रहे ये हमले पूरी तरह से अनुचित और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं। खाड़ी देशों का मानना है कि ईरान अपनी आंतरिक विफलताओं और अली लारीजानी जैसे बड़े अधिकारियों की सुरक्षा न कर पाने का गुस्सा पड़ोसी देशों पर निकाल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी पक्ष के खिलाफ युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं और उन पर किए जा रहे हमले क्षेत्र की स्थिरता को खत्म करने की एक सुनियोजित साजिश है।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए मिडिल ईस्ट में शांति की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। ईरान के कड़े रुख और खाड़ी देशों की जवाबी तैयारियों ने पूरे क्षेत्र को एक महायुद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर गहरी चिंता जता रहा है, लेकिन धरातल पर मिसाइलों और बमों का शोर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आने वाले दिन इस क्षेत्र के भविष्य और वैश्विक शांति के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।

 

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