शिमला। हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में उस समय एक बड़ी प्रशासनिक हलचल देखने को मिली जब बहुचर्चित कोटखाई प्रकरण से जुड़े आइपीएस अधिकारी जहूर हैदर जैदी ने अपनी सेवा में दोबारा वापसी की। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से कानूनी राहत मिलने के उपरांत आइजी जहूर हैदर जैदी ने मंगलवार शाम लगभग 4:30 बजे राज्य पुलिस मुख्यालय शिमला पहुंचकर अपनी ज्वाइनिंग रिपोर्ट दी। हालांकि, विभाग द्वारा फिलहाल उन्हें किसी विशिष्ट पद या नई जिम्मेदारी का कार्यभार नहीं सौंपा गया है, लेकिन उनकी इस वापसी ने पुलिस महकमे और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
अदालत से मिली बड़ी कानूनी राहत
जहूर हैदर जैदी की सेवा में यह वापसी पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद संभव हो पाई है, जिसमें उन्हें एक बड़ी राहत प्रदान की गई थी। कोटखाई में एक नाबालिग छात्रा के साथ हुए जघन्य अपराध के बाद पुलिस हिरासत में हुई एक आरोपित की मौत के मामले में उन्हें सजा सुनाई गई थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले में जहूर हैदर जैदी की उम्रकैद की सजा को तब तक के लिए निलंबित करने का आदेश दिया है, जब तक कि उनकी अपील पर अदालत द्वारा कोई अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता। इसी आदेश के साथ उन्हें जमानत पर रिहा करने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। अदालत के इस रुख के बाद प्रदेश सरकार ने भी न्यायिक निर्देशों का पालन करते हुए उनकी सेवा बहाली के आदेश जारी किए।
पांच साल जेल में रहने का आधार
जमानत और सजा के निलंबन का निर्णय लेते समय उच्च न्यायालय ने कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी की थीं। अदालत ने इस तथ्य को संज्ञान में लिया कि जहूर हैदर जैदी पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से जेल की सलाखों के पीछे रह चुके हैं। इसके साथ ही, अदालत ने यह भी माना कि वर्तमान में न्यायपालिका में अपीलों की एक लंबी कतार लगी हुई है, जिसके कारण इस विशिष्ट मामले के जल्द निपटारे की संभावना काफी कम दिखाई देती है। इन्हीं परिस्थितियों और समय अवधि को आधार बनाते हुए अदालत ने जहूर हैदर जैदी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार की शर्त पर रिहा करने की अनुमति दी थी।
पुलिस विभाग में बढ़ी सरगर्मी
जैसे ही जहूर हैदर जैदी मंगलवार को शिमला स्थित पुलिस मुख्यालय पहुंचे और अपनी ज्वाइनिंग की औपचारिकताएं पूरी कीं, पूरे महकमे में इसे लेकर गहन चर्चा शुरू हो गई। लंबे समय बाद किसी वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी की इस तरह से वापसी होना विभाग के भीतर एक बड़ा विषय बना हुआ है। सरकारी आदेशों के बाद उनकी बहाली तो हो गई है, लेकिन अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में सरकार उन्हें कौन सी जिम्मेदारी सौंपती है या उन्हें किस विभाग में तैनात किया जाता है। फिलहाल वह बिना किसी पोर्टफोलियो के मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।
कोटखाई कांड और पृष्ठभूमि की यादें
जहूर हैदर जैदी से जुड़ा यह पूरा विवाद साल 2017 के उस घटनाक्रम से शुरू हुआ था जिसने पूरे हिमाचल प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। शिमला जिले के कोटखाई में एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म और उसके बाद उसकी हत्या का मामला सामने आया था। इस संवेदनशील मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था। इन्हीं गिरफ्तार आरोपितों में से एक सूरज नामक व्यक्ति की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। हिरासत में हुई इस मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे और मामले ने काफी तूल पकड़ा था।
सीबीआइ जांच और सजा का निर्धारण
पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को सौंप दी गई थी। सीबीआइ ने अपनी गहन जांच के बाद जहूर हैदर जैदी सहित आठ अन्य पुलिसकर्मियों को इस हिरासत में हुई हत्या के लिए जिम्मेदार माना और उन पर गंभीर आरोप तय किए। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, जनवरी 2024 में चंडीगढ़ स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। विशेष अदालत ने जहूर हैदर जैदी और अन्य सात पुलिसकर्मियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, इसी मामले में शिमला के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू नेगी को अदालत ने साक्ष्यों और सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति
जहूर हैदर जैदी को सीबीआइ कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद से ही वह न्यायिक हिरासत में थे, लेकिन अब उच्च न्यायालय से सजा के निलंबन और जमानत मिलने के बाद उनकी प्रशासनिक सेवाओं में वापसी हुई है। मंगलवार की ज्वाइनिंग के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर उनके भविष्य की रूपरेखा तय की जाएगी। कोटखाई का वह मामला आज भी प्रदेश की जनता की स्मृतियों में ताजा है, और ऐसे में एक मुख्य आरोपित अधिकारी की दोबारा वर्दी में वापसी को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। पुलिस मुख्यालय में उनकी ज्वाइनिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब आगामी सरकारी आदेशों का इंतजार किया जा रहा है।