भराड़ीसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भराड़ीसैंण में अग्निवीर कैडेट्स के साथ एक आत्मीय संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भविष्य के सैनिकों का मनोबल बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं और युवाओं के सवालों के बड़ी सहजता के साथ उत्तर दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अग्निवीरों के भविष्य की सुरक्षा करना उनकी सरकार की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है। उन्होंने एलान किया कि राज्य सरकार ने पुलिस और अन्य वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की स्थाई व्यवस्था की है, ताकि सेना से सेवा पूरी कर लौटने के बाद उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
संवाद के दौरान कैडेट्स ने मुख्यमंत्री से उनके निजी और राजनीतिक जीवन से जुड़े रोचक सवाल पूछे। शंकर सिंह राणा ने जब पूछा कि सैनिक पुत्र होने के कारण क्या उनका मन कभी सेना में जाने का नहीं हुआ, तो पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सेना की सेवा सर्वोपरि और अत्यंत सम्मानजनक है। उन्होंने बताया कि भले ही वे स्वयं सेना में न जा सके हों, लेकिन अपने पिता से मिले अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को वे आज भी अपने जीवन का आधार मानते हैं। उन्होंने कहा कि जिस समर्पण भाव से एक सैनिक सीमाओं की रक्षा करता है, उसी भावना के साथ वे प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में उत्तराखंड की जनता की सेवा करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने “धाकड़ धामी” वाले स्वरूप पर भी चर्चा की। रितेश पंवार के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जनता के प्रति उनका व्यवहार सदैव सौम्य रहता है, परंतु जब बात राज्य के व्यापक हितों की आती है, तो वे कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी), सख्त नकल विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून जैसे साहसिक फैसलों का उल्लेख करते हुए बताया कि ये कदम उत्तराखंड के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य थे। जब उनसे उनके चेहरे पर हमेशा रहने वाली मुस्कान का राज पूछा गया, तो उन्होंने इसका श्रेय प्रदेश की जनता से मिलने वाले प्यार और आशीर्वाद को दिया।
पलायन और स्वरोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के युवाओं को उनके घर के पास ही काम मिले। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार भी अग्निवीरों को विभिन्न क्षेत्रों में अवसर प्रदान करने के लिए योजनाएं बना रही है। पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना के बढ़ते आधुनिकीकरण और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता की सराहना की। उन्होंने कहा कि देहरादून में बन रहा भव्य ‘सैन्यधाम’ राज्य के बलिदानियों की स्मृतियों को जीवंत रखेगा।
मुख्यमंत्री ने पूर्व सैनिकों को अपने अभिभावक की संज्ञा दी और कहा कि सैनिकों का त्याग पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। इस विशेष अवसर पर यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल सहित कई पूर्व सैनिक और बड़ी संख्या में अग्निवीर कैडेट्स उपस्थित रहे। यह संवाद युवाओं में नया जोश भरने वाला साबित हुआ।