Himachal: एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पर 10 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप और सीबीआई ने शुरू की जांच

शिमला। हिमाचल प्रदेश में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के एक बड़े अधिकारी और एक निजी आर्किटेक्ट कंसल्टेंट के खिलाफ भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। पालमपुर में तैनात एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पर एक पेट्रोल पंप की फाइनल एनओसी जारी करने और प्रक्रिया को सुचारू रखने के बदले 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। इस शिकायत के आधार पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मुकदमा दर्ज कर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।

यह पूरा मामला मोहाली के रहने वाले कारोबारी ईशान धींगरा की शिकायत पर आधारित है। ईशान धींगरा के अनुसार, उन्हें वर्ष 2020 में ‘नायरा एनर्जी लिमिटेड’ की ओर से कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र के गांव मोहल में एक पेट्रोल पंप की डीलरशिप आवंटित हुई थी। इसके बाद उन्होंने नियमानुसार पुलिस, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनएचएआई जैसे तमाम विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने की प्रक्रिया शुरू की। एनएचएआई ने सभी दस्तावेजों की जांच के बाद जून 2021 में उन्हें प्रोविजनल एनओसी दे दी थी।

अक्टूबर 2023 तक ईशान धींगरा ने सभी संबंधित विभागों से अनुमतियां प्राप्त कर लीं, जिसके आधार पर एनएचएआई ने उन्हें फाइनल एनओसी भी जारी कर दी। मार्च 2025 में उन्होंने पेट्रोल पंप का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू किया। आरोप है कि इसी दौरान एनएचएआई पालमपुर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने अपनी टीम के साथ निर्माण स्थल का निरीक्षण किया और इसके बाद चंडीगढ़ की एक महिला आर्किटेक्ट कंसल्टेंट सीमा के जरिए उनसे संपर्क किया गया।

ईशान धींगरा ने सीबीआई को दी शिकायत में आरोप लगाया कि सीमा ने उनके सामने प्रोजेक्ट डायरेक्टर की ओर से 10 लाख रुपये की मांग रखी। जब उन्होंने यह अवैध रकम देने से साफ इनकार कर दिया, तो एनएचएआई ने प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई करते हुए उनके पेट्रोल पंप के ठीक सामने की मुख्य सड़क को खोद दिया। सड़क कट जाने के कारण पेट्रोल पंप तक वाहनों का पहुंचना नामुमकिन हो गया और उनका कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया।

शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि फरवरी 2026 की शुरुआत में उन्हें पालमपुर स्थित एनएचएआई कार्यालय भी बुलाया गया था, जहां उन्हें घंटों इंतजार कराने के बाद एक रेस्टोरेंट में ले जाया गया। वहां भी उनसे कथित तौर पर 10 लाख रुपये की मांग दोहराई गई। इस उत्पीड़न से तंग आकर उन्होंने सीबीआई का दरवाजा खटखटाया। सीबीआई ने प्राथमिक जांच के बाद शिमला थाने में मामला दर्ज किया है। वर्तमान में सीबीआई ने आरोपित प्रोजेक्ट डायरेक्टर और सीमा को पूछताछ के लिए शिमला कार्यालय तलब किया है। इस घटना ने सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मनमानी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

Pls read:Himachal: हिमाचल के मनोनीत राज्यपाल कविंद्र गुप्ता का शिमला में भव्य स्वागत और मंगलवार को लेंगे शपथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *