नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष अब अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है। इजरायल और अमेरिका की एक तरफ और ईरान की दूसरी तरफ से हो रही लगातार गोलाबारी ने पूरे क्षेत्र में अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। इस जंग की आग अब धीरे-धीरे अन्य खाड़ी देशों तक भी फैलने लगी है। ईरान ने अपनी युद्ध रणनीति के तहत उन देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे या उनके रणनीतिक हित मौजूद हैं। इस क्रम में सऊदी अरब, कतर, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे गए हैं।
ईरान के समर्थन में लेबनान स्थित संगठन हिजबुल्लाह ने भी इजरायल पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। हिजबुल्लाह द्वारा किए गए धमाकों के जवाब में इजरायली वायुसेना ने लेबनान में उनके ठिकानों को नेस्तनाबूद करना शुरू कर दिया है। इजरायली सेना का मुख्य ध्यान अब ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ के उन मुख्यालयों और भंडारण केंद्रों पर है, जहाँ से इजरायल के खिलाफ ड्रोन संचालित किए जा रहे हैं।
यूएई पर हुए हमलों के बीच भारत में संयुक्त अरब अमीरात के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्जा अलसयेघ ने एक बड़ा बयान देकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में वह वैश्विक प्रभाव और क्षमता है कि उनके मात्र एक फोन कॉल से यह भीषण युद्ध और तनाव शांत हो सकता है। हुसैन ने स्पष्ट किया कि ईरान का पड़ोसी होने और ‘अब्राहम समझौते’ के तहत इजरायल का भागीदार होने के नाते यूएई दोनों पक्षों से संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है। उन्होंने इस संघर्ष में खाड़ी देशों को बेवजह निशाना बनाए जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया।
जंग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार तड़के इराक के कुर्द क्षेत्र में स्थित यूएई के वाणिज्य दूतावास को भी ड्रोन हमले का शिकार होना पड़ा। हालांकि आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन दूतावास की इमारत को काफी क्षति पहुँची है। यूएई ने इस घटना पर कड़ी निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्हें इस संघर्ष में अन्यायपूर्ण रूप से घसीटा जा रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को और तेज करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि हालांकि उनकी सेना ने कई मोर्चों पर बढ़त बनाई है, लेकिन जब तक यह खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। ट्रंप ने अंतिम विजय प्राप्त करने के लिए अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने और इस लंबे समय से चले आ रहे सुरक्षा खतरे को हमेशा के लिए समाप्त करने की बात कही है। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं धुंधली नजर आ रही हैं।
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