Himachal: सोशल मीडिया पर निजी कंपनी का विज्ञापन करना एसडीएम ओशिन शर्मा को पड़ा भारी

शिमला। हिमाचल प्रदेश की चर्चित प्रशासनिक अधिकारी और शिमला की एसडीएम ओशिन शर्मा सोशल मीडिया पर एक निजी कंपनी के उत्पाद का प्रचार करने को लेकर विवादों में घिर गई हैं। इस मामले का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने उन्हें सख्त हिदायत दी है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि एक प्रशासनिक अधिकारी को इस तरह की व्यावसायिक गतिविधियों और ब्रांड प्रमोशन से खुद को पूरी तरह दूर रखना चाहिए। उन्होंने पुष्टि की है कि इस संबंध में ओशिन शर्मा को फोन के माध्यम से जरूरी दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब ओशिन शर्मा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर जिम जाने वाले लोगों के लिए एक विशेष उत्पाद का विज्ञापन करते हुए एक वीडियो साझा किया। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, आम जनता और प्रशासनिक हलकों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि एक लोक सेवक का इस तरह किसी निजी कंपनी के ब्रांड को बढ़ावा देना नैतिक और कानूनी रूप से गलत है। विवाद गहराता देख अधिकारी ने बाद में उस वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया, लेकिन तब तक यह मामला सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुँच चुका था।

ओशिन शर्मा इंटरनेट की दुनिया में काफी लोकप्रिय हैं और उनकी एक बड़ी फैन फॉलोइंग है। आंकड़ों के अनुसार, फेसबुक पर उनके करीब 3.71 लाख और इंस्टाग्राम पर 3.74 लाख फॉलोअर्स हैं। इसके अलावा उनके यूट्यूब चैनल को भी लगभग 65 हजार लोगों ने सब्सक्राइब किया है। उनकी इसी लोकप्रियता के कारण उनके द्वारा साझा की गई कोई भी सामग्री तेजी से लाखों लोगों तक पहुँचती है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर ओशिन शर्मा का कहना है कि उन्हें फिलहाल शासन की ओर से इस तरह की कोई भी आधिकारिक सूचना या नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘सिविल सर्विसेज कंडक्ट’ नियम काफी स्पष्ट हैं। नियम 15(1) के अंतर्गत कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी सेवा के दौरान किसी भी प्रकार के निजी व्यापार, व्यवसाय या अन्य नौकरी में शामिल नहीं हो सकता। किसी निजी कंपनी के उत्पाद का विज्ञापन करना या ब्रांड एंबेसडर की तरह व्यवहार करना सेवा नियमावली के विरुद्ध माना जाता है। यद्यपि अधिकारियों को सूचना के प्रसार के लिए सोशल मीडिया के उपयोग की स्वतंत्रता है, लेकिन उन्हें पद की गरिमा, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखनी अनिवार्य है।

बिना अनुमति के किसी भी व्यावसायिक गतिविधि में भागीदारी करना विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बन सकता है। मुख्य सचिव के कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि भविष्य में अधिकारियों को अपनी सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा ताकि उनकी पेशेवर जिम्मेदारी और निजी सक्रियता के बीच कोई विवाद उत्पन्न न हो। अब यह देखना होगा कि इस हिदायत के बाद संबंधित अधिकारी का रुख क्या रहता है।

 

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