लालकुआं (नैनीताल)। नैनीताल जनपद के लालकुआं स्थित बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की मांग ने अब एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में मंगलवार को जनता इंटर कॉलेज के विशाल परिसर में एक भव्य प्रदर्शन और जनसभा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक सभा में बिंदुखत्ता और आसपास के क्षेत्रों से 12 हजार से अधिक लोगों की भारी भीड़ उमड़ी, जिसे इस आंदोलन के अब तक के सफर का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। एसपी सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में भारी पुलिस बल सभा स्थल पर तैनात रहा, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सभा के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने राज्य सरकार और पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। वक्ताओं का कहना था कि बिंदुखत्ता के निवासी पिछले कई दशकों से राजस्व गांव का दर्जा प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के तीन अलग-अलग मुख्यमंत्रियों ने समय-समय पर इस क्षेत्र को राजस्व गांव बनाने की सार्वजनिक घोषणाएं कीं, लेकिन दुर्भाग्यवश आज तक उन वादों को अमली जामा नहीं पहनाया गया है। ठोस कार्रवाई के अभाव में हजारों परिवार आज भी अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर हैं और उन्हें केवल आश्वासनों से बहलाया जा रहा है।
राजस्व गांव का दर्जा न होने के कारण बिंदुखत्ता क्षेत्र आज भी विकास की मुख्यधारा से काफी हद तक कटा हुआ है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों के चलते क्षेत्र में कई बुनियादी जनसुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है, जिससे आम जनता को रोजमर्रा की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार की उदासीनता के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शासन स्तर पर जल्द ही कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया कि वे अपनी मांग को लेकर हल्द्वानी से लेकर देहरादून और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक कूच करने से पीछे नहीं हटेंगे।
इस विशाल जनसभा को संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक इंद्र सिंह पनेरी और पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू ने प्रमुख रूप से संबोधित किया। इनके अतिरिक्त हरीश दुर्गापाल, हरीश पनेरू, प्रमोद कलोनी, रमेश जोशी, हरीश बिशौती, भरत नेगी और नंदन बोरा ने भी सरकार को घेरते हुए अपने विचार रखे। वन अधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी, बहादुर सिंह जग्गी, पुष्कर दानू, कुंदन मेहता और उमेश भट्ट सहित कई सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुहिम को अपना पूर्ण समर्थन दिया। सभा के अंत में वक्ताओं ने एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि जब तक राजस्व गांव की मांग पूरी नहीं होती, संघर्ष जारी रहेगा।