शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में उस समय एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई जब विधायकों ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली और उनके व्यवहार पर कड़े सवाल उठाए। मामला विधायकों के फोन न उठाने और जनसमस्याओं के प्रति अधिकारियों की कथित उदासीनता से जुड़ा था। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लिया है और स्पष्ट किया है कि जनप्रतिनिधियों की इस तरह की उपेक्षा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे उन अधिकारियों के नाम लिखकर विधानसभा सचिवालय को सौंपें जो उनके फोन का जवाब नहीं देते हैं, ताकि विधानसभा के नियमों के तहत उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा सके।
यह मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान विधायक राकेश कालिया ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि जनता के जरूरी कामों के लिए भी अधिकारी विधायकों के फोन नहीं उठाते हैं। कालिया ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारियों की मनमानी इतनी बढ़ गई है कि वे कॉल न उठा पाने की स्थिति में बाद में वापस कॉल करने की जहमत तक नहीं उठाते। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत बताया। राकेश कालिया ने सरकार को आगाह किया कि यदि इस रवैये पर तुरंत लगाम नहीं कसी गई, तो वे प्रभावित जनता के साथ मिलकर संबंधित अधिकारियों के दफ्तरों के बाहर धरना देने पर विवश होंगे।
विधायक ने एक कड़ा सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को ऐसे अधिकारियों का टेलीफोन भत्ता (अलाउंस) तत्काल बंद कर देना चाहिए। उनका तर्क था कि जब ये अधिकारी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर रहे और जनप्रतिनिधियों से संवाद नहीं कर पा रहे, तो उन्हें इस सरकारी सुविधा का लाभ लेने का कोई अधिकार नहीं है। राकेश कालिया के इस रुख को सदन में व्यापक समर्थन मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर के सदस्यों ने मेज थपथपाकर उनकी बात का समर्थन किया। यह पहला मौका नहीं था जब इस तरह की शिकायत आई है, इससे पहले भी कई मंत्री और विधायक अधिकारियों के अड़ियल रवैये को लेकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इस पूरी चर्चा के बाद व्यवस्था देते हुए कहा कि विधायक जनता के प्रतिनिधि हैं और उनकी बात न सुनना एक गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और इसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अध्यक्ष ने राकेश कालिया को निर्देश दिए कि वे साक्ष्यों के साथ ऐसे अधिकारियों की सूची सचिवालय को दें। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे स्वयं इस मामले का संज्ञान लेंगे और दोषियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार उचित कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष के इस कड़े रुख के बाद अब प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है।