नई दिल्ली। देश की सबसे धनी नगर निकाय, मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। भारतीय जनता पार्टी की पार्षद रितु तावड़े को निर्विरोध रूप से मुंबई का नया मेयर चुन लिया गया है। यह जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण है क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) ने उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया था। इस घटनाक्रम के साथ ही मुंबई नगर निगम पर पिछले 25 वर्षों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का वर्चस्व आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। साथ ही, लगभग चार दशकों के लंबे अंतराल के बाद बीएमसी में महापौर का पद भाजपा के खाते में गया है।
रितु तावड़े मुंबई की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा हैं और वह घाटकोपर पश्चिम क्षेत्र से तीन बार पार्षद चुनी जा चुकी हैं। उन्हें नागरिक प्रशासन और जन कल्याणकारी कार्यों का एक दशक से भी अधिक का जमीनी अनुभव है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच उनकी पहचान एक व्यवहारिक और प्रभावी नेता के रूप में रही है। वह प्रशासनिक दक्षता और स्थानीय जनता के साथ सीधे जुड़ाव के लिए जानी जाती हैं। तावड़े ने अपने राजनीतिक करियर में सामुदायिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाने और उनके समाधान के लिए काम करने वाली एक कर्मठ नेता के रूप में अपनी छवि बनाई है।
बीएमसी के चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो 227 सदस्यीय इस सदन में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। वहीं, उनकी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन के पास कुल 118 पार्षदों की शक्ति है, जिससे महापौर पद पर उनकी जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी। विपक्षी खेमे में संख्या बल की कमी और रणनीति में बदलाव को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया, जिससे रितु तावड़े की निर्विरोध नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया।
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी), जिसने वर्ष 1997 से लगातार 25 वर्षों तक इस शक्तिशाली निकाय पर शासन किया था, इस बार केवल 65 सीटों तक ही सिमट कर रह गई। उनके सहयोगी दलों में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने छह सीटें और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने मात्र एक सीट हासिल की। यह चुनाव परिणाम मुंबई की राजनीति में सत्ता के केंद्र के खिसकने का स्पष्ट संकेत है। रितु तावड़े का मेयर बनना न केवल भाजपा के लिए एक बड़ी संगठनात्मक उपलब्धि है, बल्कि यह मुंबई के विकास मॉडल और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में भी बड़े बदलाव की आहट है। अब शहर की सत्ता की कमान भाजपा के हाथों में आ गई है, जिससे आने वाले समय में निकाय के कामकाज में नई नीतियों के लागू होने की संभावना है। रितु तावड़े के नेतृत्व में अब मुंबई नगर निगम नए विजन के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।
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