नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में चाइनीज मांझे के कारण हो रहे जानलेवा हादसों को रोकने के लिए एक अत्यंत कठोर निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने पूरे प्रदेश में चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। शासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, अब यदि चाइनीज मांझे के कारण किसी भी व्यक्ति की जान जाती है, तो उसे केवल एक हादसा नहीं, बल्कि ‘हत्या’ का मामला माना जाएगा और उसी के अनुरूप दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को पूरे राज्य में सघन छापेमारी करने और इस अवैध कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी सीधे शासन के उच्चतम स्तर से की जाएगी।
यह सख्त फैसला लखनऊ में हुई एक हृदयविदारक घटना के बाद लिया गया है। बुधवार की शाम राजधानी के बुलाकी अड्डा स्थित हैदरगंज पुल के पास 33 वर्षीय मोहम्मद शोएब अपनी बाइक से जा रहे थे। अचानक उनकी गर्दन में चाइनीज मांझा फंस गया। इससे पहले कि शोएब कुछ समझ पाते या बाइक को नियंत्रित कर पाते, मांझे की धार ने उनकी गर्दन की नसों को बुरी तरह काट दिया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण वे अचेत होकर सड़क पर गिर गए। राहगीरों और पुलिस की मदद से उन्हें तुरंत ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मोहम्मद शोएब एक निजी कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) के पद पर कार्यरत थे और हेलमेट लगाकर सुरक्षित तरीके से बाइक चला रहे थे, लेकिन चाइनीज मांझे की कातिल धार के सामने उनकी सुरक्षा भी धरी की धरी रह गई।
इस घटना ने एक बार फिर उस खतरे को उजागर कर दिया है जो पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश की सड़कों पर मंडरा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक और अन्य उच्चाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे उन सभी विक्रेताओं और निर्माताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें जो प्रतिबंधित होने के बावजूद गुपचुप तरीके से चाइनीज मांझे का व्यापार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जनहानि के ऐसे मामलों में उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा और संबंधित क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी यदि उनके इलाके में नियमों का उल्लंघन पाया गया।
चाइनीज मांझा, जो वास्तव में सिंथेटिक या नायलॉन का बना होता है और जिस पर कांच या धातु की कोटिंग होती है, पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों में इससे पहले भी कई डरावने हादसे दर्ज किए गए हैं। नवंबर 2017 में बाजारखाला इलाके में इकराम नामक व्यक्ति की गर्दन मांझे से कट गई थी। मई 2018 में गोसाईगंज के पास राम कुमार गंभीर रूप से घायल हुए थे। नवंबर 2020 में हुसड़िया फ्लाईओवर पर बाराबंकी निवासी लवकुश इसकी चपेट में आए थे। हाल के वर्षों में 2022 से लेकर 2025 तक लगातार ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनमें आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिस अधिकारी भी चोटिल हुए हैं। फरवरी 2025 में ही बीबीडी इलाके में अमन नामक युवक घायल हुआ था।
इन बढ़ते हादसों को देखते हुए योगी सरकार ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। अब केवल जुर्माना या जब्ती तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। ‘हत्या’ की श्रेणी में मामला दर्ज होने के बाद दोषियों को उम्रकैद जैसी कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे चाइनीज मांझे का उपयोग न करें और यदि कहीं इसकी बिक्री हो रही है, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या हेल्पलाइन नंबर पर दें। पतंगबाजी के शौकीनों को सूती धागे (सद्दी) का उपयोग करने की सलाह दी गई है, जो पर्यावरण और मानव जीवन के लिए सुरक्षित है।
मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख के बाद पूरे प्रदेश में पुलिस विभाग सक्रिय हो गया है। थोक बाजारों और दुकानों पर छापे मारे जा रहे हैं। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मोहम्मद शोएब जैसी किसी और बेगुनाह की जान पतंगबाजी के इस खतरनाक शौक के कारण न जाए। उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में इस फैसले को एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस प्रतिबंध को जमीनी स्तर पर कितनी कड़ाई से लागू कर पाता है ताकि भविष्य में उत्तर प्रदेश की सड़कों पर कोई मासूम गर्दन इस जानलेवा धागे का शिकार न बने।
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