नई दिल्ली। संसद के निचले सदन लोकसभा में मंगलवार को भी भारी अफरा-तफरी और हंगामे का माहौल बना रहा। सोमवार को हुए शोर-शराबे के बाद उम्मीद थी कि मंगलवार को स्थिति सामान्य होगी, लेकिन इसके उलट सदन की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान पड़ता रहा। हंगामे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पीठासीन अधिकारी को सदन की कार्यवाही को तीन बार स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। विपक्षी दल और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ते टकराव के कारण सदन का कीमती समय बर्बाद हुआ और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।
मंगलवार सुबह जैसे ही 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। शोर-शराबे के कारण प्रश्न काल की प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं चल सकी। विपक्षी सदस्यों के कड़े रुख को देखते हुए सदन को पहली बार दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। जब 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो उम्मीद थी कि कुछ शांति होगी, लेकिन हंगामा पहले से भी तेज हो गया। परिणामस्वरूप, कुछ ही मिनटों के भीतर सदन को दूसरी बार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
दोपहर 2 बजे जब सदन फिर से जुटा, तो विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए। उन्होंने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों, विशेषकर चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर चल रही गतिविधियों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। राहुल गांधी ने सदन में दावा किया कि यह मामला सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इस पर चर्चा अनिवार्य है। हालांकि, जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, सत्ता पक्ष की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। सरकार का तर्क था कि राहुल गांधी जिन तथ्यों का हवाला दे रहे हैं, वे प्रामाणिक नहीं हैं।
इस तीखी नोकझोंक के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभाला और राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सदन की कार्यवाही को बाधित करने के लिए जानबूझकर ऐसे विषयों को उठा रहे हैं जिनका कोई ठोस आधार नहीं है। विवाद की मुख्य जड़ पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक ‘अप्रकाशित किताब’ बनी। किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी एक ऐसी किताब के अंशों या उससे जुड़े मैगजीन आर्टिकल का हवाला दे रहे हैं जो अभी तक सार्वजनिक तौर पर प्रकाशित ही नहीं हुई है। सत्ता पक्ष का स्पष्ट तर्क था कि जब कोई किताब पब्लिश ही नहीं हुई है, तो उसे आधिकारिक तौर पर सदन में कोट नहीं किया जा सकता। रिजिजू ने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे इस विषय को छोड़कर अन्य चर्चाओं में भाग लें, लेकिन राहुल गांधी अपनी मांग पर अड़े रहे।
हंगामे के बीच सदन की गरिमा को लेकर भी एक विवाद उत्पन्न हुआ। जब सदन में बहस चल रही थी और आसन पर कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी बैठे थे, तब किसी सदस्य ने चेयर को संबोधित करते हुए ‘यार’ शब्द का प्रयोग कर दिया। इस पर कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कड़ा ऐतराज जताया और संबंधित सदस्य को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह देश की संसद है और यहाँ एक निश्चित गरिमा और अनुशासन (डेकोरम) बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने सवाल किया कि सदन के भीतर ‘यार’ जैसे शब्दों का क्या मतलब है और इसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस भाषाई मर्यादा के उल्लंघन के बाद सदन में तनाव और बढ़ गया।
पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने राहुल गांधी को बार-बार समझाने की कोशिश की कि वे व्यवस्थित तरीके से अपनी बात रखें, लेकिन जब राहुल गांधी केवल चीन के मुद्दे पर ही अड़े रहे, तो चेयर ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है जैसे वे बोलना ही नहीं चाहते। गतिरोध बढ़ता देख आसन ने राहुल गांधी के स्थान पर नरेश उत्तम पटेल का नाम पुकारा और उन्हें बोलने के लिए आमंत्रित किया। इसके बावजूद सदन में शोर-शराबा कम नहीं हुआ और विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते रहे।
सदन के भीतर मचे इस घमासान के कारण दोपहर 3 बजे तक के लिए कार्यवाही को फिर से रोकना पड़ा। सरकार की ओर से यह बार-बार कहा गया कि वे चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्षी दल केवल एक ऐसी रिपोर्ट के आधार पर चर्चा चाहते हैं जिसकी विश्वसनीयता पर सवाल हैं। वहीं विपक्ष का कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए और तथ्यों को छिपाना नहीं चाहिए। मंगलवार की यह पूरी घटना दर्शाती है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विश्वास की कमी और मुद्दों पर आपसी असहमति के कारण विधायी कार्य किस तरह प्रभावित हो रहे हैं। पूरे दिन की कार्यवाही में एक भी महत्वपूर्ण बिल या प्रश्न पर सार्थक चर्चा नहीं हो पाई और दिन भर केवल स्थगन और हंगामे का दौर चलता रहा।
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