Israel: ईरान और पाकिस्तान को इजरायल की दो टूक, आतंकवाद समर्थकों का गाजा में स्वागत नहीं – The Hill News

Israel: ईरान और पाकिस्तान को इजरायल की दो टूक, आतंकवाद समर्थकों का गाजा में स्वागत नहीं

नई दिल्ली। इजरायल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से ईरान और पाकिस्तान के प्रति एक अत्यंत सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है। स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच के दौरान एक विशेष साक्षात्कार में बरकत ने वैश्विक सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिति पर खुलकर बात की। उन्होंने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसने भविष्य में इजरायल के खिलाफ कोई भी उकसावे वाली कार्रवाई की, तो उसका परिणाम भयावह होगा। बरकत के अनुसार, इजरायल ऐसी स्थिति में सात गुना अधिक शक्ति के साथ हमला करेगा और ईरान को उसकी ऐतिहासिक भूल का करारा जवाब दिया जाएगा।

नीर बरकत ने ईरान पर पिछले कई दशकों से सशस्त्र चरमपंथी समूहों को खाद-पानी देने और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने ईरान को ‘बुराई की धुरी’ का सरगना करार देते हुए कहा कि तेहरान का एकमात्र लक्ष्य इजरायल का विनाश रहा है। इसके लिए ईरान ने न केवल हजारों की संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कीं, बल्कि गाजा में हमास और लेबनान में हिज्बुल्लाह जैसे आतंकी संगठनों को सैन्य और वित्तीय रूप से मजबूत कर इजरायल की सुरक्षा के लिए निरंतर खतरा पैदा किया है। बरकत का यह बयान ईरान की विस्तारवादी और आक्रामक नीतियों पर इजरायल के कड़े विरोध को दर्शाता है।

साक्षात्कार के दौरान इजरायली मंत्री ने गाजा के भविष्य और वहां प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की संरचना पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने पाकिस्तान, कतर और तुर्की जैसे देशों के नाम लेते हुए उन्हें किसी भी शांति प्रक्रिया या सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। बरकत ने कड़े शब्दों में कहा कि जो देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद का समर्थन करते हैं, उनका गाजा की धरती पर किसी भी रूप में स्वागत नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल उन देशों पर कतई भरोसा नहीं कर सकता जो जिहादी संगठनों के मददगार रहे हैं।

ईरान की वर्तमान सैन्य स्थिति पर टिप्पणी करते हुए बरकत ने कहा कि हालिया इजरायली सैन्य कार्रवाइयों ने पूरी दुनिया के सामने ईरान की खोखली ताकत की पोल खोल दी है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अपनी जिस कथित शक्ति के पीछे छिपता रहा है, वह अब उजागर हो चुकी है। इजरायल ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर कड़ा प्रहार कर उसे एक तरह से पंगु बना दिया है। बरकत के अनुसार, ईरान उतना शक्तिशाली नहीं है जितना वह खुद को प्रदर्शित करने की कोशिश करता रहा है।

हालांकि, बरकत ने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल का मुख्य उद्देश्य अपनी सीमाओं की रक्षा करना है, न कि ईरान में सत्ता परिवर्तन करना। उन्होंने कहा कि यदि ईरान अपनी सरकार बदलना चाहता है, तो यह वहां के लोगों का आंतरिक मामला है, लेकिन यदि वे इजरायल को धमकाएंगे, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने एक कूटनीतिक द्वार खोलते हुए कहा कि यदि ईरान अपना इजरायल विरोधी रवैया छोड़कर वास्तविक शांति की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो इजरायल को सहयोग करने में प्रसन्नता होगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति योजना की सराहना करते हुए नीर बरकत ने इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों से कहीं बेहतर बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र एक पक्षपाती संस्था बन चुका है, जबकि ट्रंप का प्रस्ताव अधिक व्यावहारिक और प्रभावी है। इजरायल के इस कड़े रुख ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है, विशेष रूप से पाकिस्तान और कतर जैसे देशों के लिए यह बयान एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। नीर बरकत के इस संबोधन ने यह साफ कर दिया है कि इजरायल अब अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के मामले में किसी भी प्रकार के बाहरी या संदिग्ध हस्तक्षेप को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

 

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