नई दिल्ली। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बयानों और हालिया रणनीतिक फैसलों ने पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर दी है। विशेष रूप से यूरोपीय देशों में इस मुद्दे को लेकर गहरी बेचैनी और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। डोनल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने की लगातार दी जा रही धमकियों के बीच अब अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने ग्रीनलैंड में स्थित पिटुफ्फिक अंतरिक्ष बेस पर ‘उत्तरी अमेरिकी एयरोस्पेस डिफेंस कमांड’ (NORAD) के लड़ाकू विमान तैनात करने का निर्णय लिया है। इस सैन्य हलचल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है।
NORAD की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ग्रीनलैंड में अमेरिका की यह सैन्य सक्रियता किसी अचानक पैदा हुई परिस्थिति का परिणाम नहीं है, बल्कि यह वहां की दीर्घकालिक योजनाबद्ध गतिविधियों को पूरा करने का एक हिस्सा है। अमेरिका का दावा है कि पिटुफ्फिक बेस पर एयरक्राफ्ट की यह तैनाती डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों से आवश्यक संपर्क करने के बाद ही की गई है।
इस सैन्य कदम की विस्तृत जानकारी देते हुए NORAD ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया कि उनके विमान जल्द ही ग्रीनलैंड के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण पिटुफ्फिक स्पेस बेस पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। ये नए लड़ाकू विमान वहां पहले से मौजूद अमेरिका और कनाडा के विमानों के बेड़े में शामिल होकर संयुक्त ऑपरेशंस को मजबूती प्रदान करेंगे। NORAD का मानना है कि इस तैनाती से न केवल उनकी दीर्घकालिक योजनाओं को समर्थन मिलेगा, बल्कि इससे अमेरिका और कनाडा के बीच के रक्षा संबंधों में भी प्रगाढ़ता आएगी।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड में मौजूद डेनमार्क सहित सभी सहयोगी सेनाओं से कूटनीतिक स्तर पर विचार-विमर्श और मंजूरी मिलने के बाद ही इन गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई है। ग्रीनलैंड की स्थानीय सरकार को भी इस पूरी प्रक्रिया के बारे में विधिवत सूचित किया गया है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में डेनमार्क की सेना ने भी ग्रीनलैंड के क्षेत्र में एक विशाल बहुराष्ट्रवादी सैन्य अभ्यास का आयोजन किया था। इस अभ्यास में जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे, नीदरलैंड और फिनलैंड जैसे देशों ने अपनी सैन्य टुकड़ियां भेजी थीं। उस समय डेनमार्क ने अमेरिकी सेना को भी इस अभ्यास में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया था।
हालांकि, डोनल्ड ट्रंप की इन विस्तारवादी नीतियों का ग्रीनलैंड के भीतर कड़ा विरोध शुरू हो गया है। वहां के स्थानीय नागरिक अमेरिका के बढ़ते प्रभाव और ट्रंप के बयानों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों में लोग अमेरिका विरोधी नारे लगा रहे हैं और अपनी स्वायत्तता की रक्षा की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों में इस बात का डर है कि अमेरिका उनके द्वीप को जबरन अपने नियंत्रण में लेना चाहता है।
वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई के बाद डोनल्ड ट्रंप अब ग्रीनलैंड को हथियाने के लिए केवल सैन्य ही नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव की रणनीति भी अपना रहे हैं। उन्होंने उन यूरोपीय देशों को सीधे तौर पर निशाने पर लिया है जो इस मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन नहीं कर रहे हैं। ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जो देश अमेरिका के इस अभियान में बाधा बनेंगे, उन पर 1 फरवरी 2026 से 10 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि इसके बाद भी स्थिति अनुकूल नहीं रही, तो 1 जून 2026 से इस टैरिफ को बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक किया जा सकता है। डोनल्ड ट्रंप की इस ‘टैरिफ वॉर’ की धमकी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया संकट खड़ा कर दिया है। फिलहाल ग्रीनलैंड में अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी और ट्रंप के कड़े रुख ने दुनिया की सांसें थाम दी हैं।
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