US: डोनल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक किया इमैनुएल मैक्रों का निजी संदेश

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और फ्रांस के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक बड़ी कड़वाहट पैदा हो गई है। डोनल्ड ट्रंप ने फ्रांस को सीधे तौर पर आर्थिक दंड देने की चेतावनी देते हुए वहां से आने वाली वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस आक्रामक रुख के पीछे मुख्य कारण फ्रांस द्वारा डोनल्ड ट्रंप के महत्वाकांक्षी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) में शामिल होने के निमंत्रण को ठुकराना बताया जा रहा है। अमेरिका और फ्रांस जैसे पुराने सहयोगियों के बीच उपजे इस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है।

यह पूरा विवाद उस समय गहराया जब डोनल्ड ट्रंप ने गाजा और अन्य वैश्विक संघर्षों में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय बोर्ड के गठन का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में इस बोर्ड का मुख्य कार्य युद्ध से तबाह हुए गाजा क्षेत्र का पुनर्निर्माण करना और वहां एक अस्थायी शासन की निगरानी करना था। हालांकि, समय के साथ डोनल्ड ट्रंप ने इसके चार्टर का विस्तार कर दिया है और अब वे इसे वैश्विक शांति की दिशा में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में देख रहे हैं। जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस बोर्ड का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया, तो ट्रंप ने इसे व्यक्तिगत और कूटनीतिक अपमान के रूप में लिया।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि फ्रांस अपनी इस “दुश्मनी” और असहयोग को जारी रखता है, तो वे फ्रांसीसी उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ा देंगे। ट्रंप ने कहा, “मैं उनकी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दूंगा और फिर वे खुद-ब-खुद हमारे साथ शामिल हो जाएंगे।” हालांकि, उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में यह भी जोड़ा कि वास्तव में उन्हें शामिल होने की कोई जरूरत नहीं है। ट्रंप का यह बयान स्पष्ट करता है कि वे व्यापारिक प्रतिबंधों को अपनी कूटनीतिक नीतियों को लागू करने के लिए एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

मामला केवल टैरिफ की धमकियों तक ही सीमित नहीं रहा। डोनल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक मर्यादाओं को दरकिनार करते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इमैनुएल मैक्रों का एक निजी संदेश (प्राइवेट मैसेज) भी सार्वजनिक कर दिया। इस संदेश में मैक्रों ने डोनल्ड ट्रंप की कुछ नीतियों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया था। मैक्रों ने लिखा था कि वे और ट्रंप ईरान और सीरिया जैसे संवेदनशील मुद्दों पर एकमत हैं और मिलकर काम कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप द्वारा अपनाए गए रुख पर अपनी हैरानी व्यक्त की थी। मैक्रों ने संदेश में कहा था कि वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि ग्रीनलैंड के मामले में ट्रंप आखिर क्या हासिल करना चाहते हैं।

सार्वजनिक किए गए इस संदेश में इमैनुएल मैक्रों ने डोनल्ड ट्रंप को स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने वाले विश्व आर्थिक मंच के मौके पर मिलने का न्योता भी दिया था। मैक्रों ने ट्रंप को गुरुवार को एक विशेष रात्रिभोज (डिनर) के लिए आमंत्रित किया था। इस निमंत्रण में यह भी कहा गया था कि वे इस भोज में अन्य जी7 (G7) देशों के नेताओं के साथ-साथ यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया और रूस के प्रतिनिधियों को भी बुलाना चाहते हैं, ताकि महत्वपूर्ण वैश्विक विषयों पर चर्चा की जा सके।

डोनल्ड ट्रंप द्वारा इस निजी संवाद को सार्वजनिक किए जाने और फ्रेंच वाइन पर टैरिफ की धमकी देने के बाद से पेरिस में काफी नाराजगी है। व्हाइट हाउस, फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय, यूरोपीय संघ और फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस समूचे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और चुप्पी साधे रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डोनल्ड ट्रंप का यह रवैया नाटो और अन्य पश्चिमी गठबंधनों के बीच दरार पैदा कर सकता है। फिलहाल अमेरिका और फ्रांस के बीच का यह कूटनीतिक युद्ध आने वाले दिनों में और अधिक उग्र होने की संभावना है, जो वैश्विक व्यापार और राजनीति दोनों को प्रभावित करेगा।

 

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