देहरादून 19 जनवरी 2026
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को देहरादून के ननूरखेड़ा स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में आयोजित ‘शिक्षा की बात’ कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया और उनके विचारों को सुना। संवाद का मुख्य उद्देश्य छात्रों की शंकाओं को दूर करना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करना था। मुख्य सचिव ने न केवल बच्चों का मार्गदर्शन किया, बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी व्यवस्था सुधार के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए आनन्द बर्द्धन ने कहा कि दुनिया में हर बच्चा अपने आप में खास होता है और प्रत्येक छात्र के भीतर कोई न कोई विशिष्ट योग्यता या प्रतिभा अवश्य छिपी होती है। उन्होंने जोर दिया कि छात्रों को सबसे पहले स्वयं की रुचि और हुनर को पहचानने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों पर अपनी मर्जी थोपने के बजाय उनकी स्वाभाविक प्रतिभा को पहचानें और उन्हें उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करें।
प्रशासनिक सुधारों और बेहतर मार्गदर्शन की दिशा में मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग को कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि ‘शिक्षा की बात‘ कार्यक्रम के दायरे को और अधिक विस्तृत और प्रभावी बनाने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मंच पर केवल सरकारी अधिकारियों के व्याख्यान के बजाय समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, जैसे सफल उद्योगपतियों, जाने-माने वैज्ञानिकों और अनुभवी प्रोफेसरों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए। इन हस्तियों के साथ संवाद करने से बच्चों को न केवल प्रेरणा मिलेगी, बल्कि उन्हें विभिन्न करियर विकल्पों की व्यवहारिक जानकारी भी प्राप्त होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि क्लस्टर विद्यालयों से शुरुआत करते हुए इस कार्यक्रम को प्रदेश के सभी स्कूलों से जोड़ा जाए।
आज के डिजिटल युग में तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए आनन्द बर्द्धन ने छात्रों को एक अत्यंत गंभीर सीख दी। उन्होंने कहा कि आज का युग मोबाइल और आधुनिक तकनीक का है, जो प्रगति के लिए अनिवार्य है, लेकिन हमें यह ध्यान रखना होगा कि तकनीक पर हमारा पूर्ण नियंत्रण रहे। उन्होंने छात्रों को सचेत किया कि मोबाइल और गैजेट्स हमें नियंत्रित न करने लगें। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि वे डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर किताबों के अध्ययन, खेलकूद और रचनात्मक सोच विकसित करने पर अधिक ध्यान दें। उन्होंने कहा कि ये गतिविधियां ही व्यक्तित्व को मजबूत और संतुलित बनाती हैं।
सफलता के मार्ग पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि जीवन में कामयाबी पाने का कोई भी ‘शॉर्ट-कट’ नहीं होता। सफलता केवल एक निश्चित लक्ष्य निर्धारित करने, कड़ी मेहनत और निरंतर अनुशासन के बल पर ही प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मेहनत और अनुशासन ही व्यक्ति को एक बेहतर मनुष्य और समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से कहा कि वे बच्चों को केवल अंकों की दौड़ में न शामिल करें, बल्कि उन्हें देश के प्रति उनके कर्तव्यों को समझाने और एक नैतिक नागरिक बनाने की जिम्मेदारी भी निभाएं।
कार्यक्रम के दौरान आनन्द बर्द्धन ने छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किए गए विभिन्न साइंस प्रोजेक्ट्स का अवलोकन किया और उनसे तकनीकी पहलुओं पर बातचीत की। छात्रों की वैज्ञानिक सोच की प्रशंसा करते हुए उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले बच्चों के लिए देहरादून के शैक्षणिक और तकनीकी भ्रमण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं। इसमें विशेष रूप से कौशल विकास विभाग के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का दौरा शामिल किया जाए, ताकि बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक और तकनीकी ज्ञान भी मिल सके। इस अवसर पर शिक्षा सचिव रविनाथ रमन और माध्यमिक शिक्षा निदेशक मुकुल सती सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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