Uttarakhand: हरिद्वार में माता भगवती देवी शर्मा शताब्दी समारोह का भव्य आगाज और ध्वज वंदन के साथ गूंजी युग चेतना

हरिद्वार। कनखल स्थित वैरागी द्वीप की पावन धरा पर शुक्रवार को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक संगम का गवाह बना। अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा और अखंड दीपक के शताब्दी समारोह का विधिवत शुभारंभ ‘ध्वज वंदन’ के साथ हुआ। इस गरिमामय कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। श्रद्धा और उल्लास से भरे इस वातावरण में जब शताब्दी ध्वज लहराया, तो हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण का संकल्प लिया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह आयोजन माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन और उनकी निस्वार्थ सेवा के प्रति पूरे राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि माताजी का जीवन त्याग और साधना की वह प्रकाश पुंज है जिसने लाखों लोगों को अंधकार से निकालकर नई दृष्टि प्रदान की। मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसे किसी एक संगठन या दायरे में नहीं बांधा जा सकता, बल्कि यह एक वैश्विक प्रवाह है जो व्यक्ति के भीतर संस्कार जगाकर उसे राष्ट्र उत्थान से जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक ऊर्जा का स्मरण करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे धाम भारत की सांस्कृतिक आत्मा की धड़कन हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हरिद्वार की धरती से उठने वाला यह साधना का संदेश पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का नवजागरण लाएगा। अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए धामी ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की गई है और सख्त दंगारोधी व धर्मांतरण कानून के माध्यम से शांति व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस शताब्दी समारोह को ‘सेवा, साधना और संस्कार का त्रिवेणी संगम’ बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन नवयुग के निर्माण में एक मील का पत्थर साबित होगा। शेखावत के अनुसार, महान सभ्यताओं का विकास केवल ईंट-पत्थर के निर्माण से नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र निर्माण से होता है। जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों और अनुशासन को जीवन का आधार बनाते हैं, तभी एक सशक्त संस्कृति का जन्म होता है।

समारोह के मार्गदर्शक और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने अपनी ओजस्वी वाणी से जनसमूह में उत्साह भरा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन कोई सामान्य कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच है जहाँ व्यक्ति स्वयं के भीतर सोई हुई शक्तियों और दायित्वों को पुनः खोज सकता है। उन्होंने ‘आत्मपरिवर्तन से समाज परिवर्तन’ का नारा देते हुए कहा कि जब व्यक्ति स्वयं बदलने का साहस करेगा, तभी दुनिया बदलेगी। पण्ड्या ने अपनी पंक्तियों “गंगा की कसम, यमुना की कसम, यह ताना-बाना बदलेगा। कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा” के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की नींव में व्यक्तिगत आचरण के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट अतिथियों, जिनमें न्यायाधीश परविन्दर सिंह, अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और कई संत समाज के प्रतिनिधि शामिल थे, को स्मृति चिन्ह और गंगाजली भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, मदन कौशिक और पूर्व विधायक संजय गुप्ता सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। 23 जनवरी तक चलने वाला यह शताब्दी समारोह विचारों और कर्मों में सकारात्मक बदलाव लाने की एक बड़ी मुहिम के रूप में देखा जा रहा है। ध्वज वंदन के साथ शुरू हुआ यह महाकुंभ आने वाले दिनों में मानवीय मूल्यों के संरक्षण की नई दिशा तय करेगा।

 

Pls reaD:Uttarakhand: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक

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