शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में जल शक्ति विभाग के सरकाघाट कार्यालय में भ्रष्टाचार के आरोपों ने हड़कंप मचा दिया है। हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता यदोपति ठाकुर ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए करोड़ों रुपये के हेर-फेर का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में विभाग के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए पहले सोशल मीडिया का सहारा लिया और अब वे इसकी आधिकारिक शिकायत सरकार के उच्च स्तर पर करने जा रहे हैं।
यदोपति ठाकुर ने आरोप लगाया है कि सरकाघाट में जल शक्ति विभाग के टेंडर आवंटन की प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उनके अनुसार, टेंडर के नाम पर करोड़ों रुपये का लेन-देन और भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा है। यदोपति ठाकुर ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से इस मुद्दे को सार्वजनिक किया, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
भ्रष्टाचार के इन आरोपों के बीच यदोपति ठाकुर ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से फोन पर विस्तृत बातचीत की। उन्होंने उप-मुख्यमंत्री को सरकाघाट क्षेत्र की दयनीय स्थिति से अवगत कराया और विभागीय अधिकारियों की मनमानी की जानकारी दी। ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि वे केवल मौखिक शिकायतों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अगले एक-दो दिनों के भीतर तमाम तथ्यों और साक्ष्यों के साथ एक लिखित शिकायत उप-मुख्यमंत्री को सौंपेंगे, ताकि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित हो सके।
यदोपति ठाकुर ने भ्रष्टाचार के साथ-साथ क्षेत्र में व्याप्त मानवीय संकट की ओर भी ध्यान खींचा है। उन्होंने बताया कि सरकाघाट क्षेत्र की लगभग 10 से 15 पंचायतों में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। विडंबना यह है कि एक तरफ करोड़ों के टेंडर हो रहे हैं और दूसरी तरफ जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। ठाकुर ने खुलासा किया कि इस इलाके में पिछले साल नवंबर और दिसंबर महीने के दौरान पीलिया का प्रकोप गंभीर रूप से फैल गया था। दूषित पानी की आपूर्ति या पानी के अभाव में पनपी इस बीमारी के कारण एक स्थानीय महिला की जान भी जा चुकी है।
नेत्री का आरोप है कि जब क्षेत्र की जनता संकट के दौर से गुजर रही थी, तब विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपने दफ्तरों से नदारद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय विभागीय अधिकारियों का पूरा ध्यान कुछ चहेते ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने पर केंद्रित है। यदोपति ठाकुर ने इस गड़बड़ी को पकड़ने के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां भी मांगी थीं, लेकिन विभाग की ओर से उन्हें अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। उनका मानना है कि सूचना छिपाना ही इस बात का प्रमाण है कि विभाग में कुछ बड़ा छुपाया जा रहा है।
यदोपति ठाकुर ने कड़े शब्दों में कहा कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और सरकारी धन की लूट को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। वे इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार को अभी लिखित शिकायत का इंतजार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे ही यदोपति ठाकुर की ओर से औपचारिक शिकायत प्राप्त होगी, सरकार उन सभी आरोपों की बारीकी से जांच करवाएगी। अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल, कांग्रेस नेता के अपनी ही सरकार के विभाग पर लगाए गए इन संगीन आरोपों ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।