Punjab: पंजाब विधानसभा में साहिबजादों की लासानी कुर्बानी को किया गया नमन और वीर बाल दिवस के नाम पर उठी बहस

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र की शुरुआत एक भावुक और श्रद्धापूर्ण माहौल में हुई। सदन की कार्यवाही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों और माता गुजरी जी की लासानी कुर्बानी को नमन करते हुए शुरू की गई। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने छोटे साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को याद किया और कहा कि उनके इस त्याग को इतिहास कभी नहीं भुला सकेगा। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह शहादत न केवल पंजाब बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है।

आम आदमी पार्टी के विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि छोटे साहिबजादों को हर तरह का लालच दिया गया और डराया धमकाया गया लेकिन वे अपनी आस्था और सिद्धांतों से डिगे नहीं। निज्जर ने कहा कि इस मौके पर हमें दीवान टोडर मल और मोती राम मेहरा के योगदान को भी याद करना चाहिए। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि इस पवित्र अवसर पर छोटी छोटी बहसों से बचा जाना चाहिए।

कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत ने केंद्र सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छोटे साहिबजादों की कुर्बानी को पूरी दुनिया नहीं भूल सकती लेकिन आज इतिहास को खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि साहिबजादों को वीर बाल कहा जा रहा है जबकि वे हमारे बाबा हैं। इसी तरह बंदा सिंह बहादुर को बंदा बैरागी कहना गलत है क्योंकि अमृतपान करने के बाद वे बैरागी नहीं रहे। राणा गुरजीत ने मांग की कि सदन में एक प्रस्ताव पास किया जाना चाहिए कि केंद्र सरकार सिखों के इतिहास के साथ छेड़छाड़ न करे।

भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा ने कहा कि हम अभी तक केवल नाम पर ही अटके हुए हैं जबकि इस देश के हर राज्य में साहिबजादों की कुर्बानी को याद किया गया है। उन्होंने कविता के माध्यम से श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह बलिदान देश को जोड़ने के लिए है न कि बांटने के लिए। इस पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने उनसे पूछा कि साहिबजादे शहादत दिवस की जगह इसका नाम बाल दिवस करने की सिफारिश किसने की थी। जवाब में अश्वनी शर्मा ने कहा कि वे इस पवित्र मौके पर राजनीति नहीं करना चाहते और इंटरनेट मीडिया पर सब कुछ उपलब्ध है।

इस दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक 10 लाख से अधिक परिवारों और मनरेगा मजदूरों के पत्र लेकर विधानसभा पहुंचे। मान सरकार का कहना है कि इन पत्रों के जरिए मजदूरों और गरीबों की आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंचाई जाएगी। सभी विधायक गरीबों की पुकार लेकर एकजुट होकर सदन में पहुंचे।

 

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