शिमला। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलने और इसके मूल ढांचे में बदलाव करने के विरोध में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। राजधानी शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक विशाल धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और इस फैसले को गरीबों के हितों पर कुठाराघात बताया गया। प्रदर्शन में प्रदेश मामलों के सह प्रभारी चेतन चौहान समेत पार्टी के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने केंद्र सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना पूर्व की यूपीए सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों और मजदूरों के लिए शुरू की गई थी और इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से जोड़ा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर न केवल महात्मा गांधी का अपमान किया है बल्कि इस महत्वपूर्ण योजना को कमजोर करने की भी साजिश रची है।
विनय कुमार ने कहा कि भाजपा एक सोची समझी रणनीति के तहत ग्रामीण गरीबों और असहाय लोगों को उनके काम के अधिकार से वंचित कर रही है। उन्होंने प्रदेश की जनता से आह्वान किया कि वे इस नए बिल का डटकर विरोध करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी गरीब और असहाय लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने से कभी पीछे नहीं हटेगी।
प्रदर्शन के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए विनय कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस बिल को तोड़ मरोड़ कर और जबरदस्ती पास कराया है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे और सड़कों पर उतरकर इसका कड़ा विरोध करेंगे। विनय कुमार ने याद दिलाया कि मनरेगा कानून इसलिए बनाया गया था ताकि लोगों को उनकी पंचायत में ही रोजगार मिल सके और उन्हें काम के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने बताया कि जब यह कानून बना था तब बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया था और पूरी प्रक्रिया के बाद इसे पास किया गया था।
लेकिन इस बार सरकार ने विपक्ष को विश्वास में लिए बिना ही इस बिल को पास करा दिया है। विनय कुमार ने चिंता जताई कि रोजगार की गारंटी देने वाली यह योजना पलायन रोकने के लिए थी लेकिन अब नई योजना के लागू होने से गांवों से पलायन और बढ़ेगा। कांग्रेस का मानना है कि यह फैसला ग्रामीण भारत के लिए घातक साबित होगा।