कुरुक्षेत्र/नई दिल्ली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शिरकत की। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पावन धरती पर पहुंचकर धामी ने गीता के महत्व और उसकी आधुनिक प्रासंगिकता पर विस्तार से अपनी बात रखी। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीमद्भगवद्गीता को केवल एक धार्मिक किताब तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यह मानवता के लिए एक शाश्वत ज्ञान है जो पूरे विश्व को सही दिशा दिखाने का काम कर रहा है।
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इसी भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को वह दिव्य उपदेश दिया था जो आज भी मानव समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि गीता हमें धर्म, कर्तव्य, सत्य और निष्काम कर्म का पाठ पढ़ाती है। इस भव्य आयोजन के जरिए गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उन्होंने हरियाणा सरकार और स्वामी ज्ञानानंद के प्रयासों की सराहना की। धामी ने अपने व्यक्तिगत जीवन का जिक्र करते हुए बताया कि वे बचपन से ही गीता के उपदेशों का पालन करते आ रहे हैं। जीवन के हर मोड़ पर और हर कठिन निर्णय लेने में गीता ही उनकी मार्गदर्शक रही है। उनका मानना है कि व्यक्तिगत स्वार्थ और अहंकार को छोड़कर समाज और राष्ट्र की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जब इंसान भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है और जीवन तनावपूर्ण हो गया है, तब गीता का संदेश और भी ज्यादा जरूरी हो गया है। गीता के अठारह अध्याय इंसान को जीवन जीने का संतुलित और उद्देश्यपूर्ण तरीका सिखाते हैं। यही कारण है कि आज दुनिया के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में गीता पर शोध किए जा रहे हैं। इसे अब केवल पूजा-पाठ की वस्तु नहीं बल्कि लीडरशिप, मैनेजमेंट और मानसिक शांति के ग्रंथ के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
इस मौके पर धामी ने एक बड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता के महत्व को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के सभी स्कूलों में अब प्रतिदिन गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को फिर से पा रहा है और विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अपने संबोधन के अंत में पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदमों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देवभूमि के मूल स्वरूप को बचाए रखने के लिए सरकार ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कठोर कानून बनाया है। इसके अलावा राज्य में एक सख्त दंगा रोधी कानून भी लागू किया गया है। सरकार ने कार्रवाई करते हुए दस हजार एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। उन्होंने गर्व से कहा कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करके सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की व्यवस्था की है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, अवधेशानंद गिरी, स्वामी लोकेश मुनि समेत कई गणमान्य संत और लोग मौजूद रहे।
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