Uttarakhand: उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में भालू के आतंक से दहशत में लोग रात भर जागकर कर रहे पहरेदारी – The Hill News

Uttarakhand: उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में भालू के आतंक से दहशत में लोग रात भर जागकर कर रहे पहरेदारी

देहरादून/उत्तरकाशी। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों जंगली जानवरों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि लोगों का अपने घरों में भी चैन से सोना मुश्किल हो गया है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से भालुओं द्वारा आबादी वाले क्षेत्रों में घुसकर हमले करने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। उत्तरकाशी से लेकर चमोली और लैंसडौन तक भालुओं ने कोहराम मचा रखा है। कहीं घरों के दरवाजे तोड़े जा रहे हैं तो कहीं गोशालाओं में घुसकर मवेशियों को निवाला बनाया जा रहा है। इन घटनाओं के कारण ग्रामीण शाम होते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

सबसे डरावनी स्थिति उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक स्थित गोविंद वन्य जीव विहार पार्क क्षेत्र में बनी हुई है। यहां के जखोल गांव के जाबिल्च तोक में बृहस्पतिवार देर रात एक भालू बस्ती के बीच घुस आया। भालू इतना आक्रामक था कि उसने कई रिहायशी घरों और छानियों के दरवाजे तोड़ डाले। गंगा सिंह रावत, धाम सिंह और गौर सिंह समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि भालू के हमले और दरवाजे टूटने की आवाज सुनकर पूरे गांव में अफरातफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों के अंदर दुबके रहे और पूरी रात जागकर बिताई। ग्रामीणों का कहना है कि भालू का व्यवहार बहुत हिंसक हो चुका है और वह कभी भी किसी इंसान को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

यही हाल लैंसडौन वन प्रभाग से सटे यमकेश्वर ब्लॉक के सार गांव का भी है। यहां भालू एक सीरियल किलर की तरह मवेशियों को निशाना बना रहा है। पिछले दस दिनों के भीतर यहां भालू ने तीन गाय और एक बछड़े को मार डाला है। ग्राम प्रधान कृष्णा नेगी और विनय नेगी ने बताया कि शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे भालू ने पशुपालक भोला दत्त की गोशाला का दरवाजा तोड़कर गाय को मार दिया। इससे पहले मुन्नी देवी और जगदीश सिंह रावत के मवेशियों को भी भालू अपना शिकार बना चुका है। लगातार हो रही इन घटनाओं से पशुपालकों में भारी आक्रोश और डर है।

चमोली जिले में भी भालू की दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही है। यहां दशोली विकासखंड के स्यूंण गांव में वन विभाग की गश्त के बावजूद भालू ने हमला कर दिया। ग्रामीण धीरेंद्र राणा ने बताया कि गांव वाले भालू को भगाने के लिए रात एक बजे तक पटाखे फोड़ते रहे। लेकिन जैसे ही पटाखों का शोर थम गया, भालू ने हमला बोल दिया और महावीर सिंह राणा की गोशाला तोड़कर गाय को मार डाला। वहीं नंदा नगर के ग्राम महड़ बगठी में भी भालू ने रघुवीर लाल के दो बैलों को मार दिया। ग्राम प्रधान गौरव सती के अनुसार लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।

उत्तरकाशी के ही बौंगा, रैथल और कैलसु गांवों में भी भालू दिखने से लोग परेशान हैं। अनिल सिंह रावत और सुरजीत सिंह राणा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर सुरक्षा की गुहार लगाई है। इन घटनाओं पर पार्क की उप निदेशक निधि सेमवाल और रेंजर अनुराग जोशी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में वन कर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है ताकि प्रभावितों को जल्द मुआवजा दिया जा सके।

 

Pls read:Uttarakhand: अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पुष्कर सिंह धामी ने कहा गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *