शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार को लॉटरी के जरिए राजस्व जुटाने के लिए अब दिवाली के बाद तक इंतजार करना पड़ेगा। राज्य में लॉटरी दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया ई-टेंडर में देरी के कारण आगे खिसक गई है। इससे सरकार की सालाना करीब 50 करोड़ रुपये की संभावित आय प्रभावित हो रही है। लॉटरी विभाग ने तीन सितंबर को ई-टेंडर जारी किया था और तकनीकी निविदाएं 15 सितंबर को खोली जानी थीं। हालांकि, निविदा प्रक्रिया में शामिल पंजाब और पश्चिम बंगाल की एक-एक प्रमुख कंपनी ने प्रस्तावित शर्तों पर आपत्ति जताई है। इसके बाद विभाग ने दस्तावेजों में संशोधन करने का फैसला लिया है।
विभाग की ओर से संशोधित निविदा दस्तावेज तीन से चार दिनों के भीतर वेबसाइट पर अपलोड किए जाने की संभावना है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। पहले योजना थी कि चयनित कंपनी को 30 दिनों के भीतर लॉटरी संचालन के लिए अधिकृत पत्र जारी कर दिया जाएगा। लेकिन अब नए कार्यक्रम के अनुसार लॉटरी शुरू करने की प्रक्रिया दिवाली के बाद ही आगे बढ़ पाएगी।
एक एजेंट को मिलेगा पूरे प्रदेश का जिम्मा
सरकार की योजना पूरे हिमाचल प्रदेश में लॉटरी संचालन के लिए एक ही एजेंट को अधिकृत करने की है। इसके लिए सालाना लाइसेंस फीस 10 करोड़ रुपये प्रस्तावित की गई है। इस राशि में हर वर्ष पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान भी रखा गया है। इसके अतिरिक्त चयनित एजेंट को 30 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी जमा करनी होगी। साथ ही छह करोड़ रुपये के भुगतान की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
सरकार का उद्देश्य लॉटरी संचालन के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे राजस्व की नियमित प्राप्ति हो और पूरे प्रदेश में प्रक्रिया एक ही अधिकृत एजेंसी के माध्यम से संचालित की जा सके। हालांकि, कंपनियों की आपत्तियों के बाद निविदा की शर्तों में होने वाले बदलाव पर आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी।
साल में तीन बड़े बंपर ड्रॉ होंगे
प्रस्तावित योजना के तहत प्रदेश में प्रतिदिन अधिकतम 12 डेली ड्रॉ आयोजित किए जा सकेंगे। इसके अलावा साल में तीन बंपर ड्रॉ निकालने की व्यवस्था होगी। ये ड्रॉ दिवाली, लोहड़ी और दशहरा के अवसर पर आयोजित किए जाएंगे। सरकार के मौजूदा प्रारूप में सिंगल डिजिट डेली लॉटरी को शामिल नहीं किया गया है।
1999 में लगाया गया था प्रतिबंध
हिमाचल प्रदेश में लॉटरी पर वर्ष 1999 में तत्कालीन धूमल सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय लॉटरी नियमन अधिनियम-1998 की धारा सात, आठ और नौ के तहत सभी लॉटरी पर रोक लगाई गई थी। प्रतिबंध के पीछे यह चिंता थी कि अधिक कमाई की उम्मीद में लोग कर्ज लेते थे और कई बार अपनी जमा पूंजी तथा संपत्ति तक गंवा देते थे।
अब राज्य सरकार राजस्व के नए स्रोत विकसित करने के उद्देश्य से लॉटरी को दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रही है। संसाधन सृजन कमेटी ने इसकी सिफारिश की थी। कमेटी के अध्यक्ष मुकेश अग्निहोत्री हैं। कमेटी की अनुशंसा के बाद 31 जुलाई 2025 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के प्रस्ताव पर लॉटरी दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए केरल, पंजाब और सिक्किम में अपनाए जा रहे मॉडलों का भी अध्ययन किया गया। अब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही राज्य में लॉटरी संचालन की औपचारिक शुरुआत हो सकेगी।