शिमला। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) में लंबे समय से चली आ रही असंतुलित तैनाती को दुरुस्त करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के युक्तीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत स्वीकृत पदों से अधिक तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को उन क्षेत्रों में भेजा जाएगा, जहां तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
नई व्यवस्था के तहत मंडलों, उपमंडलों और विभिन्न विंग में पदों के मुकाबले अधिक संख्या में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं जरूरत वाले क्षेत्रों में ली जाएंगी। विभाग में लंबे समय से कुछ सुविधाजनक स्थानों पर कर्मचारियों की अधिक तैनाती और दूरदराज के इलाकों में तकनीकी पद खाली रहने की समस्या सामने आती रही है। युक्तीकरण का उद्देश्य उपलब्ध मानव संसाधन का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना है, ताकि सड़क निर्माण और रखरखाव सहित अन्य विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
जानकारी के अनुसार, कई जिला मुख्यालयों और सुविधाजनक मंडलों में एक स्वीकृत पद के मुकाबले दो से तीन अधिकारी या कर्मचारी संबद्ध थे। दूसरी ओर, चंबा, सिरमौर, कुल्लू, मंडी और शिमला के दूरदराज क्षेत्रों में अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता जैसे तकनीकी पद लंबे समय से खाली पड़े थे। ऐसे में इन क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की निगरानी और समय पर क्रियान्वयन प्रभावित होने की आशंका रहती है।
घटते काम के कारण एनएच विंग में भी होगा बदलाव
लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) विंग में भी काम का दायरा घटने के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाओं का नए सिरे से इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्र सरकार ने विभाग के एनएच विंग से तीन और राष्ट्रीय राजमार्ग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंप दिए हैं। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के एनएच विंग के पास 779 किलोमीटर सड़कों की जिम्मेदारी शेष रह गई है।
एक समय एनएच विंग के पास दो हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य थे, लेकिन अब इनकी राशि घटकर करीब 750 करोड़ रुपये रह गई है। काम के दायरे में आई इस कमी के चलते विंग में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं विभाग के दूसरे हिस्सों में लेने की योजना है।
एनएचएआई के पास 1244 किलोमीटर सड़कें
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में कुल 25 राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2,592 किलोमीटर है। इनमें से 1,244 किलोमीटर सड़कें एनएचएआई, 569 किलोमीटर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और 779 किलोमीटर लोक निर्माण विभाग के एनएच विंग के अधीन हैं।
राष्ट्रीय राजमार्गों की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों के पास जाने और एनएच विंग के कार्यभार में कमी आने से विभाग के भीतर कर्मचारियों की तैनाती की समीक्षा की जा रही है। युक्तीकरण के माध्यम से अतिरिक्त स्टाफ को उन क्षेत्रों में भेजने पर जोर है, जहां तकनीकी अधिकारियों की कमी के कारण विकास कार्यों को गति देने में परेशानी हो रही है। इस बदलाव से विभागीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और दूरदराज के क्षेत्रों में कामकाज मजबूत करने की उम्मीद है।