नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के साथ ही भारत में सर्दियों के मौसम को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश के बाद अब प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा अल नीनो मौसम के मिजाज को प्रभावित कर सकता है। मौसम संबंधी अनुमानों के मुताबिक, आने वाले महीनों में तापमान सामान्य से अधिक रहने और बारिश के पैटर्न में बदलाव की आशंका है। इसका असर खेती, जल संसाधनों, बिजली की मांग और लोगों की सेहत पर पड़ सकता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, अल नीनो की स्थिति मजबूत हो रही है और इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यह मौसमी घटना दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और वर्षा के सामान्य पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, किसी क्षेत्र पर इसका वास्तविक असर स्थानीय मौसम परिस्थितियों और अन्य जलवायु कारकों पर भी निर्भर करेगा।
क्या सामान्य से गर्म रहेंगी सर्दियां?
अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक होने की स्थिति है। इसके कारण वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव आते हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में तापमान और बारिश को प्रभावित कर सकते हैं।
मौजूदा अनुमानों के अनुसार, अल नीनो अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान और मजबूत हो सकता है। भारत में इसका असर सर्दियों के तापमान और वर्षा पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पूरे देश में सर्दियां कैसी रहेंगी या पहाड़ी क्षेत्रों में कितनी बर्फबारी होगी, इसका आकलन क्षेत्रवार मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
खेती और पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है असर
कम बारिश और सामान्य से अधिक तापमान का संयुक्त प्रभाव कृषि क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकता है। रबी फसलों की बुआई और शुरुआती विकास के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी महत्वपूर्ण होती है। यदि बारिश कम रहती है और तापमान अधिक होता है, तो सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है।
जलाशयों और भूजल पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। सर्दियों में पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली बर्फबारी जल स्रोतों के लिए महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी क्षेत्र में बर्फबारी सामान्य से कम रहती है, तो आगे चलकर जल उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर स्थानीय वर्षा, हिमपात और जल प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
2027 की गर्मियों को लेकर भी चिंता
अल नीनो का प्रभाव केवल सर्दियों तक सीमित नहीं रह सकता। वर्ष 2027 की शुरुआती गर्मियों में भी तापमान बढ़ने और गर्मी की लहरों का जोखिम रहने की आशंका जताई जा रही है। गर्मी बढ़ने पर घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली की खपत बढ़ सकती है। साथ ही, पानी की मांग और गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का दबाव भी बढ़ सकता है।
डब्ल्यूएमओ के पूर्वानुमानों के अनुसार, मौजूदा अल नीनो पिछले कई दशकों की सबसे मजबूत घटनाओं में शामिल हो सकता है। हालांकि, वर्ष 2015-16 के रिकॉर्ड को पार करने संबंधी दावों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय लगातार अपडेट हो रहे वैज्ञानिक आंकड़ों के संदर्भ में देखना जरूरी है।
तैयारी पर रहेगा जोर
मौसम में संभावित बदलावों को देखते हुए कृषि, जल प्रबंधन, बिजली आपूर्ति और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े विभागों के लिए समय रहते तैयारी करना महत्वपूर्ण होगा। किसानों के लिए स्थानीय मौसम सलाह के अनुसार बुआई और सिंचाई की योजना बनाना उपयोगी रहेगा। वहीं, जल संरक्षण और गर्मी से बचाव के उपाय भी आने वाले महीनों में अहम हो सकते हैं।
फिलहाल अल नीनो के मजबूत होने के संकेत जरूर मिल रहे हैं, लेकिन भारत के हर क्षेत्र में इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होगा। आने वाले महीनों के मौसम पूर्वानुमान से सर्दियों और 2027 की गर्मियों की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
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