US: रियाद पर हूतियों के हमलों से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव, सऊदी अरब और अमेरिका के सामने नई चुनौती – The Hill News

US: रियाद पर हूतियों के हमलों से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव, सऊदी अरब और अमेरिका के सामने नई चुनौती

रियाद। सऊदी अरब की राजधानी रियाद के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लगातार दो दिन हुए हमलों के दावों ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए इन्हें सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई का जवाब बताया है। घटनाक्रम से क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। इसके साथ ही अमेरिका पर भी हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने का दबाव बढ़ सकता है।

दो दिनों में हमलों से बढ़ी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार और रविवार को रियाद के प्रमुख हवाई अड्डे को निशाना बनाकर हमले किए गए। शनिवार की घटना में 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की बात कही गई है, जबकि रविवार के हमले में एक व्यक्ति की मौत और 11 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। इन आंकड़ों और घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

हूती विद्रोहियों ने कहा कि उनकी कार्रवाई सऊदी अरब की आक्रामकता के जवाब में की गई। उनके आरोपों में यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर हुए हमले भी शामिल हैं। इस बीच सऊदी लड़ाकू विमान यमनी सरकारी बलों की जवाबी कार्रवाई में सहयोग कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हूतियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों पर कब्जा किया है। यह मार्ग लाल सागर और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम है।

हूतियों की सैन्य क्षमता को लेकर चिंता

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध शुरू होने के बाद हूती विद्रोही कुछ समय तक क्षेत्रीय संघर्ष से अलग रहे थे। हालांकि, हालिया घटनाक्रम ने उनकी सैन्य क्षमता और स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने की योग्यता पर नए सवाल खड़े किए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हूती बैलिस्टिक मिसाइलों और हमलावर ड्रोनों का इस्तेमाल कर दूर स्थित ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं। उनकी हथियार आपूर्ति और स्थानीय स्तर पर ड्रोन तैयार करने की क्षमता भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है। बाब अल-मंडेब और मोखा बंदरगाह के आसपास के क्षेत्रों का रणनीतिक महत्व वैश्विक तेल और समुद्री व्यापार के कारण और बढ़ जाता है।

हमलों के बीच तेल की कीमतों में गिरावट

क्षेत्र में तनाव और समुद्री मार्गों के आसपास हमलों की खबरों के बावजूद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा क्षेत्र में संभावित संघर्षविराम को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत दो दिन की बढ़त के बाद 104 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई।

क्राउन प्रिंस पर बढ़ सकता है दबाव

इन घटनाओं से सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सामने सुरक्षा और कूटनीति से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। सऊदी अरब लंबे समय से यमन संघर्ष से बाहर निकलने की कोशिश करता रहा है, लेकिन हूतियों के बढ़ते हमलों से स्थिति और जटिल हो सकती है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी के मुताबिक, हूती हमलों में तेजी लाकर सऊदी अरब पर हवाई अभियान रोकने और पीछे हटने का दबाव बनाना चाहते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि रियाद इन घटनाओं को तनाव में गंभीर बढ़ोतरी के रूप में देख सकता है और जवाब में सैन्य दबाव बढ़ा सकता है।

अमेरिका के सामने भी मुश्किल फैसला

शनिवार के हमले में एक अमेरिकी नागरिक की मौत की खबर के बाद वाशिंगटन पर भी कार्रवाई करने का दबाव बढ़ सकता है। जब ट्रंप से हूतियों के खिलाफ अमेरिकी हमलों में शामिल होने की संभावना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसा कर सकता है और इस पर विचार करेगा।

अमेरिका पहले भी हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान चला चुका है, लेकिन बाद में संघर्षविराम पर सहमति बनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल सऊदी अरब को अमेरिकी समर्थन मुख्य रूप से खुफिया जानकारी साझा करने तक सीमित रहा है। अमेरिका के लिए ईरान के साथ पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच एक और मोर्चे पर सक्रिय होना रणनीतिक चुनौती बन सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि हूती हमलों को रोकना आसान नहीं होगा। इसके लिए लगातार हवाई निगरानी, हमलावर प्रणालियों की पहचान और यमनी सरकारी बलों की क्षमता बढ़ाने जैसे कदमों की जरूरत पड़ सकती है। ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत कुछ देशों ने अपने नागरिकों के लिए सऊदी अरब की यात्रा को लेकर चेतावनी भी जारी की है।

तुर्की और पाकिस्तान की भूमिका पर नजर

सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग को लेकर तुर्की और पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। रिपोर्ट में अगस्त में हुए एक रक्षा समझौते का उल्लेख है, जिसके तहत दोनों देशों ने सऊदी अरब की सुरक्षा में मदद की इच्छा जताई थी। हालांकि, तुर्की ने हूतियों के खिलाफ आक्रामक सैन्य अभियानों में शामिल होने से इनकार किया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि बढ़ते तनाव के बीच दोनों देश किस तरह की सहायता देने का फैसला करते हैं।

निवेश और विजन 2030 पर पड़ सकता है असर

सुरक्षा संकट सऊदी अरब की आर्थिक योजनाओं के लिए भी चुनौती पैदा कर सकता है। क्राउन प्रिंस का ‘विजन 2030’ कार्यक्रम अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालने और विदेशी निवेश बढ़ाने पर केंद्रित है। देश फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के जरिए वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमलों की वजह से रियाद में होने वाले कुछ वैश्विक कार्यक्रमों में बड़ी तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी प्रभावित हुई है। ऐसे घटनाक्रम से निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ सकती है।

सऊदी अरब पहले ही बढ़ते वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने बजट घाटे का अनुमान बढ़ाया है और इस साल अर्थव्यवस्था में 3.6 प्रतिशत गिरावट की आशंका जताई गई है। ऐसे में विदेशी निवेश और वित्तीय सहयोग की जरूरत और बढ़ सकती है।

सऊदी अरब स्थित सलाहकार फर्म एक्सेस KSA के प्रमुख सईद अल-सादी के अनुसार, हालिया घटनाओं से निवेश में देरी हो सकती है, हालांकि निवेशक पूरी तरह पीछे हटने के बजाय हालात पर नजर रख सकते हैं। अब सऊदी नेतृत्व के सामने सुरक्षा सुनिश्चित करने, संघर्ष को बढ़ने से रोकने और आर्थिक योजनाओं को जारी रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

 

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