US: स्टारलिंक को मंजूरी न मिलने पर मस्क का अंबानी पर निशाना, एकाधिकार के आरोप लगाए – The Hill News

US: स्टारलिंक को मंजूरी न मिलने पर मस्क का अंबानी पर निशाना, एकाधिकार के आरोप लगाए

वाशिंगटन। भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को कारोबार शुरू करने की अनुमति मिलने में हो रही देरी के बीच एलन मस्क ने लगातार दूसरे दिन भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी पर निशाना साधा है। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मस्क ने अंबानी को व्यंग्यात्मक अंदाज में भारत का ‘प्रधानमंत्री’ संबोधित किया और उन पर एकाधिकार बनाए रखने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उनकी इस टिप्पणी से स्टारलिंक को भारत में मंजूरी देने को लेकर चल रही बहस और तेज हो गई है।

इससे एक दिन पहले भी मस्क ने भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में देरी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि कंपनी ने पिछले पांच वर्षों में भारत सरकार के सभी कानूनों का पालन किया है, इसके बावजूद उसे अब तक अनुमति नहीं मिली है। मस्क ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या अंबानी भारत में दूरसंचार और इंटरनेट कारोबार पर प्रभाव रखने वाले प्रमुख उद्योगपति होने के कारण इस मामले में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

शुक्रवार को अपनी पोस्ट में मस्क ने अंबानी को संबोधित करते हुए लिखा कि उन्हें यह समझने में गलती हुई कि भारत में असली ताकत किसके पास है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंबानी एकाधिकार के माध्यम से भारतीय उपभोक्ताओं का शोषण जारी रखना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या अंबानी स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर देने पर विचार करेंगे।

मस्क की कंपनी स्टारलिंक उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराती है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों में भी इंटरनेट पहुंचाने की संभावना है, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड या मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है। कंपनी की ओर से ऐसी सेवाओं को दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के विकल्प के रूप में पेश किया जाता रहा है।

मस्क ने अपनी पोस्ट में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में अब भी ऐसे इलाके हैं, जहां लोगों को बेहतर इंटरनेट सुविधा नहीं मिल पाती। इसका असर बच्चों की शिक्षा और छोटे कारोबारियों के अवसरों पर पड़ सकता है। पर्याप्त इंटरनेट सुविधा के अभाव में विद्यार्थियों के लिए डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच कठिन हो सकती है, जबकि छोटे कारोबारी वैश्विक बाजार में अपने उत्पाद बेचने के अवसरों से वंचित रह सकते हैं।

मस्क का तर्क है कि स्टारलिंक जैसी सेवाएं इन चुनौतियों को कम करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, भारत में सेवा शुरू करने के लिए जरूरी नियामकीय मंजूरी और बाजार में प्रतिस्पर्धा से जुड़े सवाल इस विवाद के केंद्र में हैं। फिलहाल मस्क की टिप्पणियां कंपनी की मंजूरी को लेकर उनके सार्वजनिक असंतोष और भारतीय इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा की मांग को सामने लाती हैं।

 

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