नई दिल्ली। भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में 406 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार जीत दर्ज की। गुवाहाटी के बारसपारा क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने जमकर रन बनाए। हालांकि, भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर मैच के दौरान बने इस बड़े स्कोर से संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने बल्लेबाजों के लिए बेहद आसान परिस्थितियों और गेंदबाजों को मिलने वाली कम मदद पर सवाल उठाए।
वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 405 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। कैरेबियाई टीम की ओर से तीन बल्लेबाजों ने शतकीय पारियां खेलीं। जॉन कैंपबेल ने 101 रन बनाए, जबकि शाई होप ने 104 रनों की पारी खेली। आमिर जांगू ने भी 114 रन बनाकर टीम के बड़े स्कोर में अहम योगदान दिया। वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा और कई मौकों पर तेजी से रन बटोरे।
भारतीय गेंदबाजों के लिए गुवाहाटी की पिच पर मुश्किलें कम नहीं हुईं। टीम के सभी गेंदबाजों की इकॉनमी छह रन प्रति ओवर से ज्यादा रही। वेस्टइंडीज के दो बल्लेबाजों ने 70 से भी कम गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया। इसके बाद भारत के सामने 406 रनों का लक्ष्य था, जो वनडे क्रिकेट में बेहद बड़ा रन चेज माना जाता है।
भारतीय टीम ने लक्ष्य का पीछा करते हुए शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। शुरुआती ओवरों में वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिली, लेकिन जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, बल्लेबाजी आसान होती गई। रोहित शर्मा ने तेज गति से रन बनाते हुए 72 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। वहीं शुभमन गिल ने इससे भी तेजी से बल्लेबाजी की और केवल 62 गेंदों में शतक जड़ दिया। गिल ने आगे बढ़ते हुए दोहरा शतक भी पूरा किया।
भारत ने 43.3 ओवर में ही 406 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने वनडे क्रिकेट में पहली बार 400 या उससे अधिक रनों के लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा किया। मुकाबले में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने मिलकर कुल 811 रन बनाए, जिससे यह मैच बड़े स्कोर के कारण चर्चा में रहा।
हालांकि, मुकाबले के बाद गौतम गंभीर ने पिच की प्रकृति को लेकर अपनी राय स्पष्ट की। ब्रॉडकास्टर से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह बल्ले और गेंद के बीच बेहतर मुकाबला देखना चाहते हैं। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियां प्रशंसकों और प्रसारकों के लिए आकर्षक हो सकती हैं, लेकिन गेंदबाजों को भी कुछ सहायता मिलनी चाहिए।
गंभीर ने जोर दिया कि क्रिकेट में केवल बल्लेबाजों का दबदबा नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि गेंदबाजों के लिए भी पिच पर कुछ चुनौती होनी जरूरी है, ताकि मुकाबले में बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बना रहे। इस तरह भारत की ऐतिहासिक रन चेज के बावजूद गुवाहाटी की पिच और मैच में गेंदबाजों की भूमिका को लेकर गंभीर की प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बन गई।
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