देहरादून। उत्तराखंड की प्राकृतिक खूबसूरती अब केवल फिल्मों की लोकेशन तक सीमित नहीं रह गई है। राज्य की नई फिल्म नीति के बाद प्रदेश में फिल्म शूटिंग से जुड़ी गतिविधियों और निवेश में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पांच साल से कम अवधि में उत्तराखंड में फिल्म निर्माताओं द्वारा शूटिंग पर 1,759 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। इससे राज्य के फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन से आगे बढ़कर फिल्म निर्माण के केंद्र के रूप में विकसित होने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लागू फिल्म नीति-2024 में निर्माताओं के लिए शूटिंग की प्रक्रिया को सरल बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत सिंगल विंडो व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन और अनुदान, फिल्म पुरस्कार, प्रशिक्षण एवं छात्रवृत्ति के साथ पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। नीति का उद्देश्य केवल बाहरी फिल्म निर्माताओं को उत्तराखंड की ओर आकर्षित करना नहीं, बल्कि स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और अन्य प्रतिभाओं को भी फिल्म उद्योग से जोड़ना है।
फिल्म नीति के तहत पात्र फिल्मों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच 52 फिल्मों को अनुदान दिया गया। इनमें हिंदी फिल्मों के अलावा गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और उत्तराखंड की अन्य भाषाओं में निर्मित फिल्में भी शामिल हैं। वर्ष 2025-26 में अकेले 25 फिल्मों को अनुदान प्रदान किया गया।
प्रदेश में फिल्म निर्माण से जुड़ी गतिविधियों का दायरा भी बढ़ा है। वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक उत्तराखंड में 1,440 से अधिक फिल्मों की शूटिंग और फिल्म शूटिंग से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी की गतिविधियां दर्ज की गई हैं। इससे प्रदेश में फिल्म निर्माताओं की बढ़ती रुचि का संकेत मिलता है।
शूटिंग पर होने वाले खर्च के आंकड़ों में भी उतार-चढ़ाव के साथ समग्र रूप से बड़ी आर्थिक गतिविधि सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में शूटिंग पर 379.75 करोड़ रुपये खर्च हुए। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 332.01 करोड़ रुपये रहा। 2024-25 में शूटिंग निवेश बढ़कर 531.62 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि 2025-26 में 420.72 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 19 सितंबर 2026 तक 95.52 करोड़ रुपये का शूटिंग खर्च दर्ज किया जा चुका है।
प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पहली बार उत्तराखंड फिल्म पुरस्कार-2024 और 2025 का आयोजन भी किया जा रहा है। इसके माध्यम से राज्य में निर्मित या फिल्मांकित फिल्मों के साथ स्थानीय बोलियों और भारतीय भाषाओं की फिल्मों, कलाकारों, तकनीशियनों तथा अन्य रचनात्मक प्रतिभाओं को सम्मानित करने का प्रयास किया जा रहा है।
फिल्म शूटिंग से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ रहा है। शूटिंग टीमों के ठहरने से होटल व्यवसाय को लाभ मिलता है, जबकि कलाकारों और तकनीकी टीमों के आवागमन के लिए स्थानीय परिवहन सेवाओं की मांग बढ़ती है। स्पॉट बॉय, तकनीकी कर्मचारियों, गाइड और अन्य सेवाओं में स्थानीय लोगों को काम के अवसर मिलते हैं। फिल्मों और वेब सीरीज में स्थानीय कलाकारों के लिए भी नए अवसर बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और भौगोलिक विविधता फिल्म शूटिंग के लिए अनुकूल है। सरकार का प्रयास है कि फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो। शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाने और निर्माताओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है। फिल्मों में दिखाई देने वाली उत्तराखंड की लोकेशन भविष्य में पर्यटन के नए आकर्षण के रूप में भी विकसित हो सकती हैं।
Pls read:Uttarakhand: 15 अक्टूबर तक गड्ढामुक्त होंगी उत्तराखंड की सड़कें