नई दिल्ली। विभिन्न राज्यों के साथ किशाऊ पावर प्रोजेक्ट को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि समझौते के तहत हिमाचल को किशाऊ बांध से बनने वाली 211 मेगावाट बिजली बिना उत्पादन लागत वहन किए मिलेगी। इससे राज्य पर पड़ने वाला हजारों करोड़ रुपये का संभावित वित्तीय बोझ दूसरे राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा, जो परियोजना के पानी का इस्तेमाल करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना को लेकर हुई लंबी बातचीत के दौरान राज्य सरकार ने हिमाचल के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। करीब तीन वर्षों तक लगातार वार्ता के बाद सरकार इस महत्वपूर्ण प्रावधान को हासिल करने में सफल रही। पहले हुए समझौते के अनुसार परियोजना से पैदा होने वाली बिजली की लागत का भार हिमाचल प्रदेश को भी उठाना था। वर्तमान सरकार ने इस शर्त को स्वीकार नहीं किया और राज्य के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए बातचीत जारी रखी।
सुक्खू के अनुसार, पहले के अनुमान में किशाऊ परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश को सालाना करीब 600 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद थी। अब नए आकलन के मुताबिक राज्य को हर वर्ष लगभग 1,200 करोड़ रुपये की आय हो सकती है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने और अंततः इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने इसे हिमाचल के इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जल संसाधनों को लंबे समय से ‘बहता हुआ सोना’ कहा जाता रहा है। आने वाले समय में पानी का महत्व और बढ़ने की संभावना है, इसलिए हिमाचल अपने जल संसाधनों से जुड़े अधिकारों और आर्थिक लाभ को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है।
किशाऊ परियोजना से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही। उनके अनुसार, हिमाचल में प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या उत्तराखंड की तुलना में कम होगी। प्रभावित लोगों को भूमि अधिग्रहण से जुड़े लागू प्रावधानों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा।
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल के जल संसाधनों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी सरकार अपना पक्ष मजबूती से रख रही है। इनमें भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड और शानन पावर प्रोजेक्ट से संबंधित मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 14,000 मेगावाट की जलविद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से बड़े सार्वजनिक उपक्रम लाभ उठा रहे हैं, जबकि हिमाचल को वर्तमान में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी और एक प्रतिशत स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के तहत मिलता है।
मुख्यमंत्री ने मांग रखी कि किसी बिजली परियोजना के 12 वर्ष पूरे होने के बाद 12वें से 30वें वर्ष तक हिमाचल को 30 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी मिलनी चाहिए। 40 वर्ष पूरे होने पर परियोजना राज्य सरकार को हस्तांतरित की जानी चाहिए। यदि कोई संस्था इसके बाद भी परियोजना चलाना चाहती है तो राज्य को 50 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल देश को हर वर्ष करीब 90,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिक सेवाएं देता है। इनमें स्वच्छ हवा, ग्लेशियरों का संरक्षण और नदियों के लिए जल उपलब्ध कराना शामिल है। वहीं प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रदेश को हर साल हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की प्राकृतिक संपदा से लाभ लेने वाली संस्थाओं और कंपनियों को राज्य को उसके अनुरूप आर्थिक लाभ देना चाहिए। किशाऊ परियोजना में हिमाचल और उत्तराखंड दोनों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। दोनों राज्यों की बराबर हिस्सेदारी होगी और परियोजना में 50-50 प्रतिशत कर्मचारी दोनों राज्यों से होंगे। मुख्यमंत्री ने परियोजना का काम जल्द पूरा होने की उम्मीद जताई।
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