नई दिल्ली।
भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री शक्ति और रक्षा क्षमताओं में इजाफा करते हुए मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल ‘आईएनएस निपुण’ को आधिकारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की उपस्थिति में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान इस अत्याधुनिक पोत को कमीशन किया गया। यह जहाज पूरी तरह से भारतीय तकनीक और संसाधनों से निर्मित है, जो गहरे समुद्र के भीतर जटिल अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए तैयार किया गया है। विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) द्वारा तैयार किया गया यह पोत ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
पश्चिमी नौसेना कमान के लिए आईएनएस निपुण एक समर्पित गोताखोर सहायता पोत के रूप में कार्य करेगा। इसी श्रेणी का एक अन्य पोत आईएनएस निस्तार पहले से ही पूर्वी नौसेना कमान में अपनी सेवाएं दे रहा है, जिसे पिछले साल जुलाई में कमीशन किया गया था। आईएनएस निपुण लगभग 8,500 टन वजनी है और इसके निर्माण में 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह पोत समुद्र की सतह से 300 मीटर की गहराई तक ‘सैचुरेशन डाइविंग’ यानी संतृप्त गोताखोरी करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह संकट में फंसी पनडुब्बियों से नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने और गहरे पानी में खोज एवं बचाव कार्यों को अंजाम देने की अदभुत क्षमता रखता है।
तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो आईएनएस निपुण कई आधुनिक प्रणालियों से लैस है। यह जहाज समुद्र की तेज लहरों और खराब मौसम के बीच भी एक स्थान पर स्थिर रहने की क्षमता रखता है, जिसे ‘डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम’ कहा जाता है। इस स्थिरता के कारण यह समुद्र के भीतर खराब हो चुके जहाजों या मशीनों की मरम्मत करने में सक्षम है। इसमें 15 टन की क्षमता वाली एक सब-सी क्रेन लगाई गई है। साथ ही, समुद्र की 1,000 मीटर की गहराई तक टोह लेने और काम करने के लिए इसमें ‘रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स’ (आरओवी) की भी तैनाती की गई है। 75 मीटर तक की गहराई में यह साइड-स्टेज डाइविंग के जरिए त्वरित मिशनों को पूरा कर सकता है।
गहरे समुद्र में काम करने वाले गोताखोरों की सुरक्षा और सेहत का ध्यान रखते हुए इस जहाज के भीतर ही एक मिनी अस्पताल की व्यवस्था की गई है। इसमें आठ बिस्तरों वाला अस्पताल, एक गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) और एक आधुनिक ऑपरेशन थिएटर मौजूद है। इसके अलावा, जहाज पर ‘हाइपरबेरिक चिकित्सा’ की सुविधा भी उपलब्ध है, जो गहरे पानी के भारी दबाव से बाहर आने वाले गोताखोरों को होने वाली शारीरिक समस्याओं के उपचार में बेहद कारगर होती है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत सितंबर 2018 में हुई थी, जब रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ लगभग 2,393 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था। इसके तहत दो अत्याधुनिक डाइविंग सपोर्ट वेसल का निर्माण किया जाना था। आईएनएस निपुण की आधारशिला मार्च 2020 में रखी गई थी। कड़े समुद्री परीक्षणों और तकनीकी जांच के लंबे दौर से गुजरने के बाद इसे इसी साल 30 जुलाई को नौसेना को सौंपा गया था और अब इसे औपचारिक रूप से कमीशन कर दिया गया है। आईएनएस निपुण के आने से भारतीय नौसेना की हिंद महासागर और अरब सागर में निगरानी, बचाव और तकनीकी अभियान चलाने की क्षमताएं पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएंगी। यह पोत न केवल युद्ध की स्थिति में बल्कि शांति काल में भी समुद्र के भीतर बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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