फरीदकोट।
पंजाब के फरीदकोट में भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के आह्वान पर शनिवार को जमकर हंगामा हुआ। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां के आवास का घेराव करने निकले किसानों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने पूरे जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और कई स्थानों पर नाकाबंदी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान फरीदकोट पहुंचने में सफल रहे। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।
यूनियन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे अपनी मांगों की अनदेखी के विरोध में कुलतार सिंह संधवां के घर का घेराव करेंगे। इस चेतावनी के बाद पुलिस प्रशासन ने जिले की सीमाओं, शहर के मुख्य चौराहों और संधवां गांव को जाने वाले रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था। शनिवार सुबह से ही पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसानों का जत्थों में आना शुरू हो गया। पुलिस ने शुरुआती दौर में ही कई किसानों को रोककर उन्हें हिरासत में ले लिया और पुलिस लाइन भेज दिया, ताकि वे विधानसभा अध्यक्ष के आवास तक न पहुंच सकें।
दोपहर करीब एक बजे स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब बाहरी जिलों से आए किसानों के एक बड़े समूह ने कोटकपूरा रोड पर स्थित नेहरू पुल के पास रास्ता जाम कर दिया। किसानों के इस कदम से यातायात पूरी तरह ठप्प हो गया और सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने किसानों को समझा-बुझाकर सड़क से हटाने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। इस दौरान किसान नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई।
जब प्रदर्शनकारी किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान कई किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों के जरिए पुलिस लाइन पहुंचाया गया। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में किसानों ने पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसानों की मुख्य मांगों में लैंडमार्केट बैंक से संबंधित मुद्दा सबसे अहम है। किसान यूनियन का आरोप है कि बैंक से ऋण लेते समय किसानों से जो खाली चेक जमा करवाए गए थे, उन्हें अब तक वापस नहीं किया गया है। किसान इन चेकों को तुरंत वापस करने की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि इसी मुद्दे पर यूनियन ने पहले भी कुलतार सिंह संधवां के आवास के सामने करीब एक सप्ताह तक धरना दिया था, जिसे बाद में पुलिस ने समाप्त करवा दिया था। प्रशासन के साथ हुई पिछली वार्ताओं में कोई ठोस समाधान न निकलने के कारण किसानों ने दोबारा घेराव का रास्ता चुना।
खबर लिखे जाने तक फरीदकोट में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था। पुलिस प्रशासन ने शहर के प्रवेश द्वारों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी और बढ़ा दी है। हिरासत में लिए गए किसानों के समर्थन में अन्य जिलों से भी किसानों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। पुलिस के उच्च अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि हिंसा की कोई बड़ी घटना न हो। दूसरी ओर, किसान नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और हिरासत में लिए गए साथियों को रिहा नहीं किया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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