चम्पावत।
उत्तराखंड के चम्पावत जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम, देवीधुरा में शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन किया गया। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आयोजित इस अनूठे मेले में आस्था, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत मेल देखने को मिला। इस वैश्विक रूप से प्रसिद्ध आयोजन के साक्षी बनने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया और माँ वाराही के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
देवीधुरा में आयोजित होने वाला यह प्रसिद्ध युद्ध, जिसे ‘बग्वाल’ कहा जाता है, इस वर्ष दोपहर 1:48 बजे शुरू हुआ और 1:55 बजे तक चला। मात्र 8 मिनट तक चले इस ऐतिहासिक मुकाबले में चार खामों—वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया—के योद्धाओं ने हिस्सा लिया। परंपरा के अनुसार, बग्वालियों ने अपने हाथों में बांस और रिंगाल से बनी ढालें लेकर मैदान में प्रवेश किया। शंखनाद और जयकारों के बीच शुरू हुए इस युद्ध में पत्थर के स्थान पर फलों और फूलों का उपयोग किया गया। पीठाचार्य कीर्तिबल्लभ जोशी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई इस बग्वाल ने भाईचारे और अनुशासन की अनूठी मिसाल पेश की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक जड़ों के संरक्षण के लिए पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने जानकारी दी कि देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विकास और विरासत के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार बुनियादी ढांचे के साथ-साथ धार्मिक स्थलों का भी कायाकल्प कर रही है।
अपने संबोधन में उन्होंने ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ का उल्लेख करते हुए बताया कि कुमाऊँ के पौराणिक मंदिरों को नई पहचान दी जा रही है। देवीधुरा में गढ़वाल खाम भवन और रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में क्षेत्र में धार्मिक बुनियादी ढांचे और सौंदर्यीकरण के लिए 68.58 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 397 कार्य संपन्न किए गए हैं। इसके अलावा घटोत्कच मंदिर, हिडिंबा मंदिर और सप्तेश्वर महादेव जैसे स्थलों पर भी विकास कार्य किए जा रहे हैं।
रक्षाबंधन के अवसर पर कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं और बालिकाओं ने पुष्कर सिंह धामी की कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने सभी को पर्व की बधाई देते हुए कहा कि बग्वाल मेला उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने राजकीय मेला घोषित किए जाने के बाद इसकी व्यवस्थाओं में किए गए सुधारों पर भी चर्चा की। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री और सांसद अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, जिलाधिकारी मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। मेले के दौरान छोलिया नर्तकों की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी योद्धाओं और मंदिर समिति के सदस्यों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। माँ वाराही के जयकारों के साथ इस भव्य सांस्कृतिक उत्सव का समापन हुआ।
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