Delhi: टीएमसी के बागी सांसदों की सदस्यता पर संकट लोकसभा अध्यक्ष ने सात दिनों में मांगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 20 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन सांसदों से सात दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। मामला इन सांसदों द्वारा अपनी मूल पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने से जुड़ा है।

इस प्रशासनिक कार्रवाई से पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस विषय पर अहम सुनवाई हुई थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। बनर्जी ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि पार्टी की ओर से दी गई अयोग्यता की अर्जी पर फैसला लेने में अनावश्यक देरी की जा रही है। अदालत ने इस मामले में सभी संबंधित 20 सांसदों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा है।

अदालत और लोकसभा सचिवालय का रुख

सुनवाई के दौरान लोकसभा अध्यक्ष और सदन के सचिवालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष ने संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे दलबदल विरोधी कानून के रूप में जाना जाता है, के प्रावधानों के तहत पहले ही प्रक्रिया शुरू कर दी है और सांसदों को सात दिन का समय दिया गया है। हालांकि, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाना आवश्यक है।

टीएमसी के आरोप और कानूनी आधार

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि इन 20 सांसदों ने पार्टी की नीतियों के विरुद्ध कार्य किया है और स्वेच्छा से अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी संस्था (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं। अभिषेक बनर्जी का तर्क है कि इन सांसदों का आचरण संविधान के दलबदल विरोधी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से सदन की सदस्यता से अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। याचिका में लोकसभा अध्यक्ष और सदन के महासचिव को मुख्य प्रतिवादी बनाया गया है, ताकि वे इस मामले में त्वरित निर्णय ले सकें।

इन सांसदों को जारी किया गया है नोटिस

अयोग्यता की प्रक्रिया के दायरे में आए सांसदों के नाम
काकोली घोष दस्तीदार सुदीप बंद्योपाध्याय
शताब्दी रॉय प्रसून बनर्जी
रचना बनर्जी जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया
पार्थ भौमिक अरूप चक्रवर्ती
अधिकारी दीपक देव सयानी घोष
बापी हलदर मो. अबू ताहिर खान
कालीपदा सरेन खेरवाल असित कुमार मल
जून मालिया मिताली बाग
खलीदुर रहमान माला रॉय
शर्मिला सरकार यूसुफ पठान

यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति और देश में दलबदल कानून की व्याख्या के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले सात दिनों में इन सांसदों द्वारा दिया जाने वाला जवाब यह तय करेगा कि उनकी सदस्यता बनी रहेगी या उन्हें सदन से बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा। अभिषेक बनर्जी ने अदालत से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर निर्णय लेने में अब और अधिक समय न लगाया जाए। फिलहाल, सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।

 

Pls read:Delhi: भारी बारिश से दिल्ली एनसीआर में जल प्रलय सड़कों पर लगा लंबा जाम और मौसम विभाग का रेड अलर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *