देहरादून। उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संजोने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मुलाकात सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में संपन्न हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख महंत रवींद्र पुरी के नेतृत्व में साधु-संतों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री को बागेश्वर से प्रारंभ होने वाली आगामी पवित्र छड़ी यात्रा में सम्मिलित होने के लिए औपचारिक निमंत्रण देना था। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री और संत समाज के बीच यात्रा के पौराणिक महत्व और राज्य की आध्यात्मिक विरासत पर विस्तृत चर्चा हुई।
महंत रवींद्र पुरी ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि यह छड़ी यात्रा सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करती है और उत्तराखंड के कण-कण में रची-बसी देव संस्कृति का प्रतिबिंब है। यात्रा के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न कोनों में स्थित पौराणिक तीर्थस्थलों, प्राचीन मंदिरों और जागृत सिद्ध पीठों का भ्रमण किया जाता है। संतों ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य न केवल आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है, बल्कि पूरे साधु-संत समाज को एक सूत्र में पिरोना भी है।
धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक एकता का संगम
पवित्र छड़ी यात्रा उत्तराखंड की पहचान से जुड़ी हुई है। यह यात्रा बागेश्वर के पावन क्षेत्र से शुरू होकर राज्य के कई दुर्गम और श्रद्धा के केंद्रों तक पहुंचती है। संतों के अनुसार, ऐसी यात्राएं प्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति प्रदान करती हैं। जब देश-विदेश से श्रद्धालु इन यात्राओं के साक्षी बनते हैं, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को संबल मिलता है और उत्तराखंड की महिमा वैश्विक स्तर पर पहुंचती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया और संत समाज द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की देवतुल्य जनता की आस्था इन परंपराओं में निहित है। धामी ने विश्वास दिलाया कि सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने छड़ी यात्रा के सफल और निर्बाध आयोजन के लिए अपनी ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
पवित्र छड़ी यात्रा का संक्षिप्त विवरण
| यात्रा का मुख्य केंद्र | विवरण |
| प्रारंभ स्थल | बागेश्वर |
| मुख्य उद्देश्य | पौराणिक तीर्थस्थलों और सिद्ध पीठों का भ्रमण व संरक्षण |
| सांस्कृतिक महत्व | सनातन परंपरा को जीवंत रखना और संत समाज की एकजुटता |
| पर्यटन पर प्रभाव | आध्यात्मिक पर्यटन के माध्यम से स्थानीय आर्थिकी को मजबूती |
बैठक में उपस्थित अन्य संतों ने भी अपने विचार साझा किए और राज्य में बुनियादी सुविधाओं के विकास, विशेषकर चारधाम और अन्य धार्मिक मार्गों पर किए जा रहे सुधार कार्यों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। संतों ने कहा कि सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण से उत्तराखंड के तीर्थों की गरिमा और सुलभता बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि संतों का आशीर्वाद ही उन्हें प्रदेश की सेवा के लिए निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के हर पौराणिक स्थल को ‘मानसखंड’ और ‘केदारखंड’ की अवधारणा के तहत विकसित किया जाए ताकि भविष्य की पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।