नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। कूटनीतिक हलकों में इस सप्ताहांत होने वाली उनकी यात्रा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने फिलहाल किसी भी ठोस अपडेट से इनकार किया है। शुक्रवार को आयोजित एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से इस हाई-प्रोफाइल दौरे के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पास इस विषय पर साझा करने के लिए कोई नई जानकारी नहीं है।
रणधीर जायसवाल के इस बयान ने उन अटकलों को और हवा दे दी है जिनमें कहा जा रहा था कि भारत और बांग्लादेश के बीच कुछ अनसुलझे मुद्दों के कारण यात्रा की तारीखें बदल सकती हैं। प्रवक्ता ने दोहराया कि यदि भविष्य में कोई निश्चित कार्यक्रम तय होता है, तो उसे मीडिया के साथ साझा किया जाएगा।
राष्ट्रपति भवन की सूचना ने बढ़ाया भ्रम
प्रधानमंत्री रहमान की यात्रा को लेकर भ्रम की स्थिति तब पैदा हुई जब राष्ट्रपति भवन ने एक आधिकारिक सूचना जारी की और फिर उसे वापस ले लिया। शुरुआत में जारी विज्ञप्ति में बताया गया था कि शनिवार को होने वाले पारंपरिक ‘चेंज ऑफ गार्ड’ समारोह को रद कर दिया गया है ताकि विदेशी मेहमान के औपचारिक स्वागत की पूर्ण रिहर्सल की जा सके। इससे ऐसा संकेत मिला कि यात्रा तय कार्यक्रम के अनुसार हो रही है।
हालांकि, कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति भवन ने दोपहर में एक नया बयान जारी कर उस प्रेस रिलीज को वापस लेने की घोषणा कर दी। राष्ट्रपति भवन के इस कदम ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, क्योंकि आमतौर पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत की तैयारियां काफी पहले से सुनिश्चित कर ली जाती हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव और शेख हसीना का मुद्दा
| घटनाक्रम | कूटनीतिक प्रभाव |
| शेख हसीना का संवाद | 5 अगस्त को हुए उनके वर्चुअल संवाद ने ढाका को नाराज किया। |
| प्रत्यर्पण की मांग | बांग्लादेश सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग पर अड़ी है। |
| भारत का रुख | भारत ने हसीना के बयानों से खुद को अलग करते हुए इसे निजी मामला बताया। |
| ब्रिक्स आमंत्रण | भारत ने रहमान को ब्रिक्स आउटरीच सत्र के लिए आमंत्रित किया है। |
यात्रा में हो रही देरी के पीछे का मुख्य कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़ा विवाद माना जा रहा है। अगस्त 2024 में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना ने भारत में शरण ली थी। हाल ही में उनके एक मीडिया संवाद के बाद बांग्लादेश की वर्तमान सरकार ने उनके प्रत्यर्पण की मांग को और तेज कर दिया है। ढाका का कहना है कि संबंधों में सहजता तभी आएगी जब भारत इस विषय पर सहयोग करेगा। दूसरी ओर, भारत ने स्पष्ट किया है कि वह शेख हसीना की राजनीतिक टिप्पणियों का समर्थन नहीं करता और न ही इसमें उसकी कोई आधिकारिक भूमिका है।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यह यात्रा 23 और 24 अगस्त के लिए संभावित मानी जा रही थी। विदेश मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में उन्हें द्विपक्षीय वार्ता और दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के लिए आमंत्रित किया था। अब देखना यह होगा कि दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक बैठकों में इन विवादित मुद्दों का क्या समाधान निकलता है और क्या प्रधानमंत्री रहमान इस सप्ताहांत दिल्ली की धरती पर कदम रखेंगे। फिलहाल, दक्षिण एशिया की इन दो प्रमुख शक्तियों के बीच संबंधों की दिशा इस अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।
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