देहरादून। उत्तराखंड के मूल निवासियों को स्वरोजगार और उद्यमिता की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संचालित ‘मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना’ (एमएसएसवाई) राज्य में एक बड़ी आर्थिक क्रांति बनकर उभरी है। यह योजना न केवल स्थानीय निवासियों के लिए आय के नए स्रोत पैदा कर रही है, बल्कि देवभूमि को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बना रही है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक इस योजना के माध्यम से राज्य भर में 210 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे 3500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस योजना की सफलता को देखते हुए विभाग को 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य दिया है। योजना के अंतर्गत स्थानीय निवासियों को अपनी भूमि पर 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता के सौर संयंत्र लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं को एमएसएमई नीति-2023 के तहत वित्तीय लाभ और सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे युवाओं के लिए निवेश करना आसान हो गया है।
सौर ऊर्जा उत्पादन में टिहरी जिला सबसे आगे
योजना के क्रियान्वयन में पर्वतीय जिलों ने उत्साहजनक प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से टिहरी जिले ने राज्य में बढ़त बनाई है। जून 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल 1132 सौर ऊर्जा संयंत्र सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं।
| जिला | संयंत्रों की संख्या | कुल स्थापित क्षमता (किलोवाट में) |
| टिहरी | 369 | 69,050 |
| उत्तरकाशी | 227 | 43,660 |
| चंपावत | 144 | 28,200 |
| हरिद्वार | 86 | 16,900 |
| पौड़ी | 88 | 15,440 |
| चमोली | 72 | 11,725 |
| अल्मोड़ा | 32 | 5,600 |
इसके अलावा देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में भी सौर परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। कई अन्य परियोजनाएं वर्तमान में निर्माणाधीन हैं, जो जल्द ही ग्रिड से जुड़कर बिजली उत्पादन शुरू कर देंगी।
पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना का सबसे बड़ा प्रभाव राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। यह योजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पलायन रोकने के एक प्रभावी हथियार के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर 3500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। सौर संयंत्रों की स्थापना से बंजर पड़ी जमीन का सदुपयोग हो रहा है और ग्रामीणों को घर के पास ही उद्यमिता का अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि यह योजना उत्तराखंड के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका मानना है कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर निवेश बढ़ने से न केवल हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, जिससे अंततः राज्य के समग्र विकास को गति मिलेगी। सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि के बीच एक बेहतर संतुलन बनाना है।