लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदने की योजना शुरू की है। इस पहल से न केवल किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि देसी गायों के संरक्षण और जैविक खेती के साथ-साथ आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण को भी नया संबल मिलेगा।
वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ शिव शंकर त्रिपाठी के अनुसार, गोमूत्र एक प्राकृतिक कीटाणुनाशक है और आयुर्वेद में इसका सदियों से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। चिकित्सा क्षेत्र में विशेष रूप से लिवर से जुड़ी बीमारियों में ताजा गोमूत्र के सेवन की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, औषधि निर्माता लंबे समय से शुद्ध देसी गाय के गोमूत्र की मांग कर रहे थे ताकि विभिन्न रोगों के लिए प्रभावी दवाएं बनाई जा सकें। सरकार की इस पहल से अब बाजार में औषधीय ग्रेड के गोमूत्र की उपलब्धता सुगम हो जाएगी।
देसी गाय के गोमूत्र का विशेष महत्व
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि पारंपरिक मान्यताओं और आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे सुश्रुत संहिता में केवल देसी गाय के गोमूत्र को ही औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। विदेशी नस्ल की गायों या भैंसों का मूत्र औषधीय रूप से उतना प्रभावी नहीं होता।
| देसी गाय के गोमूत्र की विशेषताएं |
| • सूर्य केतु नाड़ी: माना जाता है कि देसी गाय के शरीर में यह नाड़ी ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करती है। |
| • रासायनिक तत्व: इसके मूत्र में स्वर्ण लवण, कॉपर और अन्य लाभकारी रासायनिक तत्व पाए जाते हैं। |
| • उपयोगिता: पाइल्स, भगंदर और लिवर रोगों की दवाओं में प्रमुखता से उपयोग। |
| • औसत उत्पादन: एक स्वस्थ देसी गाय प्रतिदिन औसतन पांच लीटर तक गोमूत्र दे सकती है। |
ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार और आर्थिक लाभ
सरकार की इस योजना का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण पशुपालकों को मिलेगा। अक्सर दूध देना बंद कर देने के बाद आवारा छोड़ दी जाने वाली गायें अब बोझ नहीं बनेंगी। एक गाय से प्रतिदिन औसतन पांच लीटर गोमूत्र प्राप्त कर पशुपालक अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। यह मात्रा गाय के खान-पान, उम्र और पानी पीने की क्षमता पर निर्भर करती है। इससे गांवों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोग गौपालन के प्रति अधिक प्रोत्साहित होंगे।
| गोमूत्र के प्रमुख औषधीय लाभ |
| • इम्युनिटी: यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है। |
| • पाचन तंत्र: पेट की समस्याओं, अपच और एसिडिटी को दूर करने में सहायक है। |
| • त्वचा रोग: सोरायसिस, एक्जिमा और दाद-खाज जैसी बीमारियों में एंटी-बैक्टीरियल गुणकारी है। |
| • डिटॉक्स: यह शरीर से हानिकारक विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने में मदद करता है। |
जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
गोमूत्र का उपयोग केवल दवा बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक उत्कृष्ट प्राकृतिक खाद और कीटनाशक भी है। सरकार की इस खरीद योजना से जैविक खेती करने वाले किसानों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल को ग्रामीण विकास और गौ सेवा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इस योजना को पूरे प्रदेश में विस्तार देने की संभावना है, जिससे यूपी का आयुर्वेद और कृषि क्षेत्र वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना सकेगा।