China: अरुणाचल में मैपिंग और नामकरण को लेकर भारत-चीन के बीच बढ़ा तनाव

बीजिंग। भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश में 27 भौगोलिक स्थानों के मानक नाम तय करने और आधिकारिक नक्शे को अपडेट करने के फैसले पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है। चीनी सरकार के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने दावा किया है कि ये सभी क्षेत्र चीन के ‘जांगनान’ इलाके का हिस्सा हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश को इसी नाम से संबोधित करता है और इसे अपने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा बताता है। बीजिंग का यह कड़ा रुख भारत के ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों की सटीक पहचान सुनिश्चित करने के प्रयासों के बाद सामने आया है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि चीन भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश के रूप में बनाए गए क्षेत्र को किसी भी तरह की मान्यता नहीं देता है। बीजिंग का तर्क है कि उन क्षेत्रों के लिए नाम जारी करना चीन के संप्रभु अधिकारों के अधीन है, जिन्हें वह अपना मानता है। चीन के इस बयान को भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर एक और प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।

भारत का साहसिक कदम और नक्शा अपडेट
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारत के सर्वे ऑफ इंडिया ने अरुणाचल प्रदेश के 21 इलाकों, चार प्रमुख दर्रों, एक ऊंचाई वाली ग्लेशियल झील और 1962 के युद्ध के शहीद के स्मारक को चिन्हित करते हुए अपना आधिकारिक नक्शा अपडेट किया। भारतीय सरकार ने स्पष्ट किया था कि इस कदम का उद्देश्य भौगोलिक स्थानों की सही पहचान करना और उनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना है। भारत ने बार-बार यह रुख दोहराया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और रहेगा।

भारत द्वारा चिन्हित महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थान
• 21 स्थानीय इलाके: सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित विभिन्न बस्तियां और क्षेत्र।
• 4 रणनीतिक दर्रे: सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ऊंचे पहाड़ी रास्ते।
• ग्लेशियल झील: अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित प्राकृतिक जल स्रोत।
• शहीद स्मारक: 1962 के युद्ध नायक की स्मृति में बना ऐतिहासिक स्थल।

बैठक के तुरंत बाद आया चीन का जवाब
दिलचस्प बात यह है कि चीन की यह तीखी प्रतिक्रिया नई दिल्ली में हुई भारत-चीन सीमा मामलों पर बातचीत के वर्किंग मैकेनिज्म (WMCC) की 36वीं बैठक के ठीक बाद आई है। 6 अगस्त को हुई इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा प्रबंधन, नियंत्रण और सीमा-पार सहयोग जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा की थी। इस बैठक का उद्देश्य सीमा पर शांति बनाए रखना था, लेकिन चीन के ताजा बयान ने कूटनीतिक माहौल में फिर से कड़वाहट घोल दी है।

विशेषज्ञों की राय
चीनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मैपिंग का यह नया प्रयास विवादित क्षेत्रों पर अपने दावों को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए है। शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गुओ जुएतांग ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में कहा कि भारत का यह कदम चीन की संप्रभुता के रुख को चुनौती देने की एक सोची-समझी कोशिश है। दूसरी ओर, भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि अपनी सीमाओं के भीतर स्थानों का नामकरण और मैपिंग करना भारत का आंतरिक मामला है और इसमें किसी दूसरे देश के हस्तक्षेप का कोई स्थान नहीं है। चीन के इस अड़ियल रवैये ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में अब भी बड़ी चुनौतियां बरकरार हैं।

 

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