Himachal: मंडी में भारी बारिश से बंद हुई सड़कें किसानों ने नाले में फेंकी कई क्विंटल सब्जियां

मंडी। हिमाचल प्रदेश में मानसून की भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिसका सबसे खौफनाक असर मंडी जिले के किसानों पर देखने को मिल रहा है। जिला मंडी में भूस्खलन के कारण कई महत्वपूर्ण मार्ग बंद हो चुके हैं, जिससे परेशान होकर किसानों को अपनी मेहनत की कमाई यानी तैयार सब्जियां नालों में फेंकने पर मजबूर होना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग के झटिंगरी उपमंडल के तहत आने वाली थलटूखोड़-मढ़ सड़क बीते सोमवार से बंद है, जिसके कारण खेतों से मंडियों तक का संपर्क पूरी तरह टूट गया है।


15 क्विंटल मूली नाले में बहाई, गोभी को पीठ पर ढोया
सड़क मार्ग बाधित होने से झुकाण गांव के किसानों के सामने अपनी फसल को बचाने की बड़ी चुनौती पैदा हो गई है। जीप चालक सुनील कुमार ने बताया कि मूली की फसल को बाजार तक पहुँचाने का कोई विकल्प नहीं बचा था, जिसके कारण लगभग 15 क्विंटल तैयार मूली को नाले में फेंकना पड़ा। वहीं, अन्य किसानों ने लगभग इतनी ही मात्रा में गोभी की फसल को अपनी पीठ पर लादकर पैदल ही उस स्थान तक पहुँचाया जहाँ से वाहन चल रहे थे। किसानों का कहना है कि पैदल ढोकर ले जाने में हुई देरी के कारण गोभी पीली पड़ने लगी है, जिससे बाजार में इसके उचित दाम मिलना नामुमकिन लग रहा है।


किसानों की आर्थिक कमर टूटी और मंडियों से कटा संपर्क
किसान हरि सिंह, ओम चंद और नंद लाल सहित अन्य ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे हर साल बरसात के मौसम में इसी तरह की आपदा की मार झेलते हैं। सड़क बंद होने से उनकी नकदी फसलें खेतों में ही खराब हो रही हैं। किसानों के अनुसार, समय पर मंडी न पहुँचने के कारण उपज की गुणवत्ता गिर जाती है, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, मार्ग बंद होने से गांव में रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर भी बुरा असर पड़ा है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।


पहाड़ी से गिरते पत्थर राहत कार्य में बन रहे बाधा
सड़क बहाली के कार्यों पर जानकारी देते हुए लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता भगत राम यादव ने बताया कि विभाग की टीमें सोमवार से ही काम पर लगी हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मार्ग को खोलने के लिए दो जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं, लेकिन पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से लगातार विशालकाय बोल्डर और मलबा गिर रहा है, जिससे बचाव कार्यों में अत्यधिक जोखिम और देरी हो रही है। सहायक अभियंता स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और मौसम साफ होते ही मार्ग को पूरी तरह खोलने का आश्वासन दिया है।


प्राकृतिक आपदा और किसानों का भविष्य
बरसात के दिनों में हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन एक सामान्य घटना बन गई है, लेकिन इसका सीधा प्रहार ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर होता है। थलटूखोड़-मढ़ मार्ग के बंद होने से दर्जनों गांवों के किसान अपनी आजीविका को लेकर चिंतित हैं। किसानों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे संवेदनशील रास्तों पर स्थायी समाधान ढूंढा जाए और फसलों के नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। फिलहाल, क्षेत्र में बारिश का सिलसिला जारी है और जब तक सड़क पूरी तरह बहाल नहीं होती, तब तक किसानों की मेहनत इसी तरह बर्बाद होने का अंदेशा बना हुआ है।

 

Pls read:Himachal: टिहरी में नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपित दिवाकर डिमरी गिरफ्तार, आंदोलन की चेतावनी के बाद पुलिस ने की कार्रवाई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *