Himachal: हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश नियमों में बड़ा बदलाव अब स्टडी लीव पर मिलेगा पूरा वेतन

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों को उच्च शिक्षा और विशेष शोध के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘अध्ययन अवकाश’ (स्टडी लीव) से संबंधित नियमों में व्यापक संशोधन करते हुए उन्हें बड़ी आर्थिक राहत प्रदान की है। वित्त (विनियम) विभाग द्वारा जारी ताज़ा अधिसूचना के अनुसार, अब यदि कोई कर्मचारी अध्ययन अवकाश पर जाता है, तो उसे अवकाश की पूरी अवधि के दौरान अपना पूर्ण वेतन प्राप्त करने का अधिकार होगा। यह व्यवस्था न केवल देश के भीतर होने वाले अध्ययनों पर लागू होगी, बल्कि विदेश जाकर शिक्षा ग्रहण करने वाले कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा।


पिछली तिथि से प्रभावी होंगे नए नियम
राज्य सरकार ने केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972 में आवश्यक संशोधन करते हुए इस महत्वपूर्ण बदलाव को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। हालांकि वित्त विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना 29 जुलाई 2026 को जारी की गई है, लेकिन सरकार ने एक विशेष प्रावधान के तहत इन संशोधित नियमों को 7 अगस्त 2024 से प्रभावी माना है। इसका अर्थ यह है कि जो कर्मचारी अगस्त 2024 के बाद अध्ययन अवकाश पर गए हैं या वर्तमान में अवकाश पर हैं, उन्हें भी इन नए नियमों के तहत वित्तीय लाभ और बकाया राशि प्राप्त होगी। सरकार का यह कदम कर्मचारियों की शैक्षणिक उन्नति की राह में आने वाली आर्थिक बाधाओं को दूर करने वाला साबित होगा।


वेतन के साथ महंगाई और मकान किराया भत्ते का लाभ
संशोधित नियम-56 के अंतर्गत किए गए प्रावधानों के अनुसार, अध्ययन अवकाश पर जाने वाले कर्मचारी को अब छुट्टी पर जाने से ठीक पहले मिलने वाला पूरा अवकाश वेतन (Leave Salary) दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल मूल वेतन तक सीमित नहीं होगा। कर्मचारी को उसके वेतन के साथ नियमानुसार देय महंगाई भत्ता (DA) और मकान किराया भत्ता (HRA) भी प्रदान किया जाएगा। पहले अध्ययन अवकाश के दौरान भत्तों और पूर्ण वेतन को लेकर कई तरह की विसंगतियां थीं, जिन्हें अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इससे शोध और उच्च शिक्षा के इच्छुक कर्मचारियों को अपने परिवार के भरण-पोषण और रहने के खर्च की चिंता नहीं सताएगी।


आय और छात्रवृत्ति के लिए प्रमाणपत्र है अनिवार्य
सरकार ने नए नियमों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। पूर्ण वेतन का लाभ उठाने के लिए संबंधित कर्मचारी को एक औपचारिक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। इस प्रमाणपत्र में कर्मचारी को यह स्पष्ट करना होगा कि अध्ययन अवकाश की अवधि के दौरान वह किसी भी प्रकार की अन्य छात्रवृत्ति, निर्वाह भत्ता या किसी अंशकालिक रोजगार से कोई पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर रहा है। यदि कोई कर्मचारी बिना किसी बाहरी वित्तीय सहायता के अपनी शिक्षा पूरी करता है, तभी वह पूर्ण अवकाश वेतन का पात्र होगा। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता का लाभ केवल उन्हीं को मिले जिन्हें इसकी वास्तविक आवश्यकता है।


वेतन के साथ छात्रवृत्ति का किया जाएगा समायोजन
संशोधित अधिसूचना में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू छात्रवृत्ति के समायोजन से जुड़ा है। यदि किसी कर्मचारी को अध्ययन के दौरान किसी संस्था से छात्रवृत्ति, वित्तीय सहायता या अंशकालिक कार्य के बदले कोई राशि प्राप्त होती है, तो सरकार उसके अवकाश वेतन में उतनी राशि की कटौती करेगी। यानी कर्मचारी को मिलने वाली छात्रवृत्ति या बाहरी आय का समायोजन उसके सरकारी वेतन के साथ किया जाएगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि दोहरे वित्तीय लाभ की स्थिति उत्पन्न न हो। राज्य सरकार का मानना है कि इन सुधारों से प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत युवाओं को अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने और आधुनिक ज्ञान हासिल करने के बेहतर अवसर मिलेंगे, जिसका अंतिम लाभ प्रदेश के शासन और विकास को ही होगा।

 

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